दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
शहर में वीआईपी कल्चर का एक ऐसा रूप देखने को मिला जिसने हजारों आम नागरिकों की सुबह को किसी बुरे सपने में बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जालंधर दौरे से ठीक एक दिन पहले प्रशासनिक स्तर पर की जा रही आनन-फानन तैयारियों और हाईवे की ‘मरहम-पट्टी’ के चलते पूरा शहर बंधक बन गया। वीरवार सुबह लंबा पिंड चौक से लेकर पीएपी चौक तक जालंधर-अमृतसर नेशनल हाईवे पर ऐसा महाजाम लगा कि वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए। सुबह के व्यस्त समय (पीक आवर्स) में शुरू हुए इस जाम का असर कुछ ही देर में शहर के अंदरूनी हिस्सों जैसे बीएसएफ चौक और गुरु नानकपुरा रोड तक फैल गया, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारी, लेकिन आम जनता बेसहारा
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पहुंच रहे हैं, जहां वे आधुनिक तर्ज पर पुनर्विकसित किए गए कैंट स्टेशन का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हाईवे से लेकर अंदरूनी रास्तों तक भारी पुलिस बल तैनात है। लेकिन विडंबना यह रही कि एक तरफ जहां सुरक्षा के चाक-चौबंद दावे किए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को जाम के दलदल में धकेल दिया गया। कैंट स्टेशन जाने वाले मुख्य रास्तों और हाईवे को चमकाने के लिए प्रशासन ने सुबह के समय ही सड़क निर्माण और पैचवर्क (मरम्मत) का काम शुरू करवा दिया।
सुबह का व्यस्त समय और एक लेन बंद, कुछ ही मिनटों में रेंगने लगे वाहन
जानकारी के अनुसार, जाम का मुख्य कारण पीएपी फ्लाईओवर से रामा मंडी की ओर जाने वाले हाईवे पर चल रहा सड़क निर्माण कार्य रहा। सुबह जब लोग अपने घरों से दफ्तर और बच्चे स्कूलों के लिए निकल रहे थे, ठीक उसी समय भारी मशीनरी हाईवे पर उतार दी गई। सड़क की मरम्मत के कारण एक लेन पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया या बेहद सीमित कर दिया गया। देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में वाहनों का दबाव इतना बढ़ गया कि लंबा पिंड चौक तक कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं। स्थिति यह थी कि फर्स्ट गियर में भी गाड़ियां आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।
भीषण गर्मी में तड़पते रहे बच्चे, दफ्तर जाने वाले हुए लेट
यह जाम उस समय लगा जब बड़ी संख्या में स्कूली बसें, वैन और अपने बच्चों को छोड़ने जा रहे अभिभावक सड़कों पर थे। जुलाई की इस चिपचिपी और भीषण गर्मी में स्कूल बसों में फंसे बच्चों का बुरा हाल हो गया। कई बच्चे गर्मी और उमस के कारण रोते हुए नजर आए। वहीं दूसरी ओर, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, बैंक कर्मी और निजी व सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोग समय पर पंच-इन नहीं कर सके। महत्वपूर्ण बैठकों और परीक्षाओं के लिए जा रहे विद्यार्थियों को भी इस लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा।
ट्रैफिक पुलिस फेल: नहीं बनाया कोई वैकल्पिक रूट प्लान
प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की सबसे बड़ी नाकामी यह रही कि इतने बड़े वीआईपी मूवमेंट और हाईवे पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कोई ट्रैफिक एडवायजरी जारी नहीं की गई। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों के लिए कोई वैकल्पिक रूट (रूट डायवर्जन) तय नहीं किया था। जो वाहन चालक अमृतसर या पठानकोट की तरफ से आ रहे थे, वे सीधे इस जाम के जाल में फंसते चले गए। जब तक पुलिस ने ट्रैफिक को संभालने की कोशिश की, तब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी थी। जाम के कारण एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं के वाहन भी सायरन बजाते हुए फंसे रहे, जिन्हें रास्ता देने के लिए भी जगह नहीं बची थी।
‘वीआईपी कल्चर’ के दावों पर जनता का फूटा गुस्सा, पीएम और प्रशासन को कोसा
जाम में फंसे वाहन चालकों और आम जनता का गुस्सा केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर फूटा। लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों को याद किया जिनमें वे अक्सर कहते हैं कि देश से ‘वीआईपी कल्चर’ खत्म हो चुका है। मौके पर मौजूद लोगों का कहना था, “अगर वीआईपी कल्चर खत्म हो गया है, तो एक नेता के आने के लिए जनता को इस तरह गर्मी में क्यों तड़पाया जा रहा है? क्या यह काम रात के समय नहीं किया जा सकता था जब ट्रैफिक का दबाव शून्य होता है?” लोगों ने रोष जताते हुए कहा कि अधिकारियों को केवल प्रधानमंत्री को खुश करने की चिंता है, उन्हें टैक्स देने वाली आम जनता की सहूलियत से कोई सरोकार नहीं है।
प्रशासन से मांग: पीक आवर्स में बंद हो निर्माण कार्य
हालांकि, घंटों की मशक्कत के बाद जब ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला, तो धीरे-धीरे वाहनों को निकाला गया, लेकिन दोपहर तक यातायात सामान्य नहीं हो सका था। इस पूरी अव्यवस्था से नाराज जालंधर के निवासियों ने प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) से मांग की है कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक दौरे या सामान्य मरम्मत के लिए दिन के समय काम न लगाया जाए। निर्माण कार्य हमेशा रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के बीच ही किया जाना चाहिए ताकि आम जनता को इस तरह की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।