दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
पंजाब के बॉर्डर बेल्ट में सरकारी संसाधनों की लूट और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पिछले 72 घंटों से पठानकोट सहित आस-पास के जिलों में चल रही इस छापामार कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया है। जांच टीम ने एक सुनियोजित सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए करीब 16 ठिकानों से 1.75 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी और कई गुप्त दस्तावेज बरामद किए हैं।
विवादित आदेश और सरकारी जमीन का सौदा
मामले की जड़ें एक पूर्व अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) के कार्यकाल के अंतिम दिनों से जुड़ी हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि उक्त अधिकारी ने अपनी सरकारी सेवा की समाप्ति से ठीक पहले अपने अधिकारों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र की करोड़ों रुपये मूल्य की 92 एकड़ पंचायती जमीन को नियमों को ताक पर रखकर निजी हाथों में सौंपने का फैसला सुनाया था।
अवैध खनन और वीआईपी कनेक्शन पर शिकंजा
इस कार्रवाई का दूसरा बड़ा पहलू प्रतिबंधित क्षेत्रों में चल रहा अवैध खनन (माइनिंग) है। माननीय हाईकोर्ट द्वारा सुरक्षा कारणों से बॉर्डर एरिया में माइनिंग पर रोक लगाए जाने के बावजूद, इस जमीन पर धड़ल्ले से क्रशर चलाए जा रहे थे।
- नेताओं और कारोबारियों के ठिकाने सील: ED की रडार पर सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले रसूखदार नेता और बड़े स्टोन क्रशर संचालक भी हैं।
- अमृतसर और गुरदासपुर तक दबिश: जालंधर विंग की अगुवाई में केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ टीमों ने तारागढ़ और सैली रोड समेत कई संदिग्ध ठिकानों को घेरकर तलाशी ली।
कागजात और डिजिटल सबूत जब्त
ED को इन छापों के दौरान नकदी के अलावा कई ऐसी बेनामी संपत्तियों के सुराग मिले हैं, जिनका रिकॉर्ड सरकारी फाइलों में दर्ज नहीं था। संदिग्धों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड को फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरे खेल में कई और सफेदपोशों और ब्यूरोक्रेट्स की संलिप्तता है, जिन पर जल्द ही शिकंजा कसा जा सकता है।