दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
श्रीलंका में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने एक बार फिर आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। मार्च महीने के भीतर तीसरी बार ईंधन महंगा होने से आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई दर में उछाल आने और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार द्वारा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को कारण बताया जा रहा है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ा है, जिससे छोटे और आयात-निर्भर देशों पर ज्यादा दबाव बन रहा है। श्रीलंका भी अपनी जरूरत का अधिकांश पेट्रोलियम उत्पाद विदेशों से आयात करता है, ऐसे में कीमतों में बदलाव का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर दिखता है।
ईंधन महंगा होने से सबसे ज्यादा असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ा है। निजी बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे सेवाएं बंद कर सकते हैं। इससे लाखों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, सरकारी परिवहन एजेंसियां भी बढ़ती लागत के कारण दबाव में हैं।
महंगाई के बढ़ते खतरे को देखते हुए छोटे व्यवसायियों और मध्यम वर्ग की चिंता भी बढ़ गई है। ईंधन महंगा होने से सामान ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, जिसका असर खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो देश में फिर से 2022 जैसे हालात बनने का खतरा बढ़ सकता है, जब श्रीलंका को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था।
विपक्षी दलों ने भी सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि आम जनता पर बोझ डालने के बजाय वैकल्पिक उपाय खोजे जाने चाहिए थे। फिलहाल, सरकार के सामने चुनौती है कि वह महंगाई को नियंत्रित करते हुए आर्थिक संतुलन बनाए रखे, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।