दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर ने देश के कई हिस्सों में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। खासकर रसोई गैस और औद्योगिक ईंधन की कमी ने आम जनजीवन से लेकर उद्योगों तक को गहरे संकट में डाल दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बड़े शहरों में काम करने वाले मजदूर अब दोबारा गांवों का रुख करने लगे हैं।
उद्योगों की रफ्तार थमी, उत्पादन पर पड़ा असर
देश के पश्चिमी और उत्तरी राज्यों में कई छोटे-बड़े उद्योग ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं। गैस सप्लाई बाधित होने के कारण उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कपड़ा, सिरेमिक और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कामकाज धीमा पड़ गया है। कई इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, जिससे हजारों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
रसोई तक पहुंचा संकट, आम आदमी बेहाल
इस संकट का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की रसोई पर देखने को मिल रहा है। घरेलू गैस सिलेंडर की उपलब्धता घटने से लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कई जगहों पर लोग घंटों इंतजार करने के बावजूद खाली हाथ लौट रहे हैं। स्थिति का फायदा उठाकर अवैध तरीके से गैस की बिक्री भी बढ़ गई है, जिससे आम उपभोक्ता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
महंगाई ने बढ़ाई परेशानी, खर्च दोगुना
जहां एक ओर गैस की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर इसकी कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है। खुले बाजार में सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके चलते मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। कई परिवारों को अब वैकल्पिक साधनों से खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मजदूरों का पलायन तेज, स्टेशन बने भीड़ के केंद्र
रोजगार और भोजन दोनों संकट में आने के कारण प्रवासी मजदूर शहर छोड़ने लगे हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग अपने परिवार और सामान के साथ गांव लौटने की कोशिश कर रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि शहर में रहना अब मुश्किल हो गया है, जबकि गांव में कम संसाधनों के बावजूद जीवन चलाया जा सकता है।
व्यापारियों और विशेषज्ञों की चेतावनी
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर और गहरा हो सकता है। सप्लाई चेन बाधित रहने से महंगाई और बढ़ेगी तथा उद्योगों को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सरकार पर बढ़ा दबाव, समाधान की उम्मीद
बढ़ते संकट के बीच सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। आम जनता की मांग है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को बढ़ावा देने की भी जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।
अनिश्चितता के बीच उम्मीद कायम
हालांकि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी। अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार और घरेलू स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों से इस संकट से उबरने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, देश एक बार फिर कठिन दौर से गुजरता नजर आ रहा है, जहां हर वर्ग किसी न किसी रूप में प्रभावित हो रहा है।