दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण हालात में बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा दी गई अंतिम डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले दोनों देशों के बीच 2 हफ्तों के लिए संघर्ष-विराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई। इस ऐलान के बाद जहां अमेरिका और ईरान दोनों ने इसे अपनी-अपनी जीत बताया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है।
ट्रंप बोले- अमेरिका की जीत
सीजफायर का ऐलान करते हुए Donald Trump ने इसे अमेरिका की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से क्षेत्र में शांति की दिशा में अहम प्रगति हुई है। हालांकि, उनके इस दावे पर खुद अमेरिका में ही सवाल उठने लगे हैं।
ईरान ने भी ठोकी जीत की दावेदारी
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि देश ने अमेरिका को अपनी 10-सूत्रीय योजना मानने पर मजबूर कर दिया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, यह समझौता ईरान की रणनीतिक जीत है। राजधानी Tehran में लोग सड़कों पर उतरकर जश्न मना रहे हैं और अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
तेहरान की सड़कों पर जश्न
सीजफायर के ऐलान के बाद Tehran में रात से ही जश्न का माहौल है। लोग झंडे लेकर सड़कों पर निकले और “अमेरिका का नाश हो” जैसे नारे लगाए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इज़राइल के झंडे भी जलाए।
अमेरिका में उठे सवाल
डेमोक्रेटिक सीनेटर Chris Murphy ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि यह समझौता अमेरिका की हार है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने सरेंडर कर दिया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे अहम क्षेत्र पर नियंत्रण से जुड़ी शर्तें मान ली हैं।
10 प्वाइंट प्लान पर विवाद
ईरान की ओर से पेश 10 शर्तों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इन शर्तों में अमेरिका द्वारा हमला न करने की गारंटी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण, यूरेनियम संवर्धन की अनुमति, सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी जैसी बातें शामिल हैं।
हालांकि, इन शर्तों को लेकर अभी तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2 हफ्तों के इस सीजफायर ने फिलहाल युद्ध की आग को ठंडा जरूर किया है, लेकिन इसे लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं संकेत दे रही हैं कि असली तस्वीर अभी साफ नहीं है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह समझौता स्थायी शांति की दिशा में कदम है या सिर्फ अस्थायी विराम।