दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा
जालंधर ग्रामीण पुलिस द्वारा आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में अब खुद पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस स्टेशन शाहकोट में एफआईआर नंबर 90, दिनांक 9 अप्रैल 2026 को दर्ज इस केस में आरोपी अकरम के घर से करीब 35 लीटर लाहन (कच्ची शराब बनाने वाला पदार्थ) बरामद दिखाया गया था। लेकिन अब एक वायरल सीसीटीवी वीडियो ने इस बरामदगी की पूरी कहानी पर संदेह पैदा कर दिया है।
एसएसपी जालंधर ग्रामीण हरविंदर सिंह विर्क के अनुसार, सामने आए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि एक ड्रम को बाहर से लाकर संबंधित स्थान पर ले जाया जा रहा है। इस फुटेज के सामने आने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि बरामदगी वास्तविक न होकर पहले से प्लान की गई हो सकती है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कथित बरामदगी के लिए एक कंटेनर की व्यवस्था की गई थी, जिससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत प्रभाव से शाहकोट के एसएचओ बलविंदर सिंह, एएसआई सुखविंदर सिंह और एक महिला कांस्टेबल को पुलिस लाइन हाजिर कर दिया गया है। साथ ही, पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एसपी (जांच) वनीत अहलावत, आईपीएस को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिन्हें जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी अकरम का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ पहले से तीन मामले दर्ज हैं, जिनमें धारा 295 आईपीसी, मारपीट और झगड़े से जुड़े केस, तथा अपहरण से संबंधित धाराएं 363 और 366 आईपीसी शामिल हैं। हालांकि, मौजूदा मामले में उठे सवालों के बाद अब जांच का फोकस पुलिस कार्रवाई की वैधता और पारदर्शिता पर भी केंद्रित हो गया है।
एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में कोई भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।