दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब अमेरिका और चीन के बीच भी टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। अमेरिकी नेतृत्व ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उसने ईरान के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका का मानना है कि ईरान को उन्नत रक्षा तकनीक मिलने से क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर हवाई सुरक्षा से जुड़े सिस्टम मिलने की आशंका ने वॉशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की किसी भी सप्लाई से उनके सहयोगी देशों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
वहीं, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संघर्ष में शामिल पक्षों को हथियार उपलब्ध नहीं कराता। चीनी पक्ष ने अमेरिका पर बेबुनियाद आरोप लगाने और माहौल को अनावश्यक रूप से भड़काने का आरोप लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनातनी बढ़ती है, तो इसका असर वैश्विक कूटनीति और व्यापार पर भी पड़ सकता है। पहले से ही संवेदनशील पश्चिम एशिया में यह विवाद नई जटिलताएं पैदा कर सकता है।
फिलहाल, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका, चीन और ईरान के बीच संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और क्या यह विवाद किसी बड़े टकराव का रूप लेता है या कूटनीतिक बातचीत से हल निकलता है।