दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार सुबह 10 बजे से ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लागू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के अनुसार, यह प्रतिबंध सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होगा और जो भी जहाज ईरानी बंदरगाहों या तटीय इलाकों में आएंगे या वहां से निकलेंगे, उन्हें इस नाकेबंदी का सामना करना पड़ेगा।
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के तहत उठाया गया है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए आने-जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी।
इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अमेरिकी नेवी को आदेश दिया है कि वह इस अहम जलमार्ग में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले जहाजों पर नजर रखे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोके। ट्रंप ने कहा कि जो जहाज ईरान को अवैध टोल देंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित मार्ग नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है और इस पर किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से प्रति जहाज करीब 20 लाख डॉलर (2 मिलियन डॉलर) शुल्क लेने का फैसला किया है और प्रतिदिन सीमित जहाजों को ही गुजरने की अनुमति देने की योजना बनाई है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर चल रही बातचीत विफल हो गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
CENTCOM ने व्यापारिक जहाजों को सलाह दी है कि वे ‘नोटिस टू मेरिनर्स’ पर नजर बनाए रखें और Gulf of Oman व होर्मुज स्ट्रेट के पास संचालन के दौरान अमेरिकी नौसेना से संपर्क में रहें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।