दोआबा न्यूज हेडलाइन, जालंधर
पंजाब के जालंधर जिले के गोराया में नेशनल हाईवे पर रविवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहाँ एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से लगभग 5 वर्षीय नर तेंदुए की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर जाँच शुरू की।
सुबह सैर पर निकले लोगों ने देखा शव
जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह जब लोग राधा स्वामी सत्संग घर के पास से गुजर रहे थे, तो उन्होंने सड़क किनारे एक तेंदुए को लहूलुहान हालत में पड़ा देखा। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही रेंज अधिकारी जसवंत सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने बताया कि तेंदुआ गोराया रेडियो स्टेशन के सामने एक खाले (नाली) के किनारे मृत अवस्था में पड़ा था। प्राथमिक जाँच में स्पष्ट हुआ कि हाईवे पार करते समय किसी अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मारी थी।
सतलुज के जंगलों से भटक कर पहुँचा था तेंदुआ
वन विभाग के रेंज अधिकारी के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि यह तेंदुआ सतलुज नदी के किनारे स्थित घने जंगलों से भोजन की तलाश में भटकते हुए हाईवे तक पहुँच गया था। फिल्लौर और गोराया के आसपास का क्षेत्र झाड़ियों, खेतों और नदी किनारे के जंगलों से घिरा हुआ है, जो जंगली जानवरों के लिए प्राकृतिक आवास जैसा है। डीएफएसओ (DFSO) कुलराज सिंह ने बताया कि तेंदुए अक्सर कुत्तों या बकरियों का शिकार करने के लिए आबादी वाले क्षेत्रों का रुख करते हैं, संभवतः यह तेंदुआ भी किसी शिकार का पीछा करते हुए हाईवे पर आ गया होगा।
गोराया में पोस्टमार्टम और मौत की पुष्टि
वन विभाग की टीम ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर गोराया में उसका पोस्टमार्टम करवाया। डॉक्टरों के पैनल ने पुष्टि की कि तेंदुए की मौत सड़क दुर्घटना में आई अंदरूनी चोटों के कारण हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि मृत तेंदुए पर कोई पहचान टैग (Tag) नहीं लगा था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूर्णतः जंगली था और किसी चिड़ियाघर या सफारी से नहीं भागा था।
सुरक्षा कारणों से किया गया अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद तेंदुए के अवशेषों को लुधियाना टाइगर सफारी ले जाया गया, जहाँ उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत शेर, बाघ और तेंदुए जैसे जानवरों को दफनाने के बजाय जलाया जाता है।
रिटायर्ड रेंज अफसर राजदीप सिंह ने इसके पीछे के कड़े नियमों की जानकारी देते हुए बताया:
“इन संरक्षित जानवरों की खाल, हड्डियों और नाखूनों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी तस्करी होती है। यदि शव को दफनाया जाए, तो तस्करों द्वारा उसे खोदकर अंग निकालने का खतरा बना रहता है। इसीलिए पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और अधिकारियों की उपस्थिति में शव को पूरी तरह जला दिया जाता है।”
पंजाब में तेंदुओं की स्थिति और विभाग की अपील
सरकारी आंकड़ों (सेंसस) के अनुसार, लगभग 5 साल पहले पंजाब में तेंदुओं की संख्या 50 के करीब दर्ज की गई थी। हाल के वर्षों में इनके रिहायशी इलाकों में दिखने की घटनाएँ बढ़ी हैं। वन विभाग ने जनता से अपील की है कि यदि कभी कोई जंगली जानवर आबादी में दिखाई दे, तो उसके करीब जाने या उसे डराने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि जान-माल का नुकसान रोका जा सके।
पुलिस और वन विभाग अब हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जाँच कर रहे हैं ताकि उस अज्ञात वाहन का पता लगाया जा सके जिसने इस संरक्षित जीव को टक्कर मारी।