दोआबा न्यूजलाइन। सतपाल शर्मा
विदेशों में बसे पंजाबियों के लिए जालंधर हमेशा से उनकी जड़ों और भावनाओं का केंद्र रहा है। कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसे देशों में रहने वाले हजारों एनआरआई परिवारों की जमीनें, मकान और कारोबार आज भी जालंधर सिटी और देहात में मौजूद हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से सामने आई है—एनआरआई अब बाहरी लोगों से कम और अपने ही रिश्तेदारों, परिचितों तथा भरोसेमंद लोगों से ज्यादा ठगी का शिकार हो रहे हैं।
एनआरआई थानों और पुलिस अधिकारियों के पास लगातार ऐसी शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि विदेश में रहने का फायदा उठाकर रिश्तेदारों ने जमीन बेच दी, फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए, बैंक खातों से पैसे निकाल लिए या मकानों पर कब्जा कर लिया। कई मामलों में भाइयों, चाचाओं, भतीजों और यहां तक कि करीबी दोस्तों के नाम भी सामने आए हैं।
मामला-1: कनाडा में बैठे एनआरआई की जमीन रिश्तेदार ने बेच डाली
जालंधर देहात के नकोदर क्षेत्र से जुड़ा एक मामला हाल ही में चर्चा का विषय बना। जानकारी के अनुसार, करीब 20 वर्ष पहले कनाडा गए एक एनआरआई ने गांव में अपनी कृषि भूमि की देखरेख की जिम्मेदारी अपने रिश्तेदार को सौंपी थी। आरोप है कि रिश्तेदार ने पहले पावर ऑफ अटॉर्नी हासिल की और बाद में कथित तौर पर जमीन के दस्तावेजों में बदलाव कर उसे किसी अन्य व्यक्ति के नाम बेच दिया।
जब एनआरआई परिवार को इसकी जानकारी मिली तो वे हैरान रह गए। गांव पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की गई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। यह घटना बताती है कि कई बार सबसे बड़ा खतरा उन लोगों से होता है, जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है।
मामला-2: जालंधर सिटी में खाली मकान पर कब्जे का आरोप
जालंधर शहर के मॉडल टाउन इलाके में भी ऐसा ही एक विवाद सामने आया। विदेश में रहने वाला एक परिवार कई वर्षों से अपने पुश्तैनी मकान की देखरेख रिश्तेदारों के भरोसे छोड़कर गया था। आरोप है कि कुछ समय बाद मकान पर कब्जा करने की कोशिश की गई और संपत्ति से जुड़े कागजात भी तैयार कर लिए गए।
जब परिवार के सदस्य विदेश से वापस आए तो उन्हें मकान से जुड़े कई दस्तावेजों में बदलाव की जानकारी मिली। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंचा। ऐसे मामलों ने एनआरआई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि लंबे समय तक विदेश में रहने के कारण उनके लिए हर गतिविधि पर नजर रखना आसान नहीं होता।
मामला-3: बैंक खाते और निवेश राशि पर भी नजर
जालंधर देहात के फिल्लौर क्षेत्र से जुड़े एक मामले में आरोप लगाया गया कि एक बुजुर्ग एनआरआई दंपत्ति ने अपने करीबी रिश्तेदार को बैंक और संपत्ति संबंधी काम देखने की जिम्मेदारी दी थी। बाद में उन्हें पता चला कि निवेश और बैंक खातों से संबंधित कुछ लेन-देन उनकी जानकारी के बिना किए गए।
मामला सामने आने के बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटीं कि दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड में क्या-क्या बदलाव किए गए थे। इस प्रकार के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि अब ठगी केवल जमीन और मकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बैंक खातों और निवेश पर भी नजर रखी जा रही है।
मामला-4: फर्जी दस्तावेजों का बढ़ता जाल
जालंधर शहर और देहात में संपत्ति विवादों के कई मामलों में फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप भी सामने आए हैं। कुछ शिकायतों में दावा किया गया कि हस्ताक्षर, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कागजात का गलत इस्तेमाल किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में रहने वाले लोगों को समय-समय पर अपनी संपत्तियों के रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए। यदि कोई दस्तावेज तैयार किया जा रहा हो तो उसकी पूरी जानकारी रखना जरूरी है।
एनआरआई थानों में बढ़ रही शिकायतें
पंजाब में एनआरआई मामलों की जांच के लिए विशेष थाने और सेल बनाए गए हैं, जहां लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति विवाद, कब्जे, फर्जी दस्तावेज और आर्थिक लेन-देन से जुड़े मामले प्रमुख रूप से सामने आते हैं।
पुलिस का कहना है कि हर शिकायत की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर की जाती है। कई मामलों में दोनों पक्षों को सुनने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।
भावनात्मक जुड़ाव बन रहा कमजोरी का कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि एनआरआई परिवार अक्सर अपने गांव, शहर और रिश्तेदारों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहते हैं। इसी कारण वे कई बार बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए जिम्मेदारियां सौंप देते हैं। वर्षों पुराने संबंधों और विश्वास का कुछ लोग गलत फायदा उठा लेते हैं।
विदेश में रहने वाले कई लोग यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि उनका परिवार या रिश्तेदार संपत्ति की देखरेख कर रहे हैं, लेकिन बाद में जब विवाद सामने आते हैं तो उन्हें कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
कानूनी जानकारों का कहना है कि एनआरआई परिवारों को कुछ सावधानियां जरूर अपनानी चाहिए। संपत्ति के दस्तावेजों की नियमित जांच, बैंक खातों पर निगरानी, सीमित अधिकारों वाली पावर ऑफ अटॉर्नी और विश्वसनीय कानूनी सलाहकार की मदद ऐसे मामलों से बचाने में मदद कर सकती है।
साथ ही, समय-समय पर राजस्व रिकॉर्ड और संपत्ति की स्थिति की जानकारी लेते रहना भी जरूरी है। आधुनिक तकनीक के जरिए ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच भी की जा सकती है।
बदलता सामाजिक माहौल और बढ़ती चुनौतियां
पंजाब में बड़ी संख्या में परिवार विदेशों में बसे हुए हैं और उनकी संपत्तियां यहां मौजूद हैं। ऐसे में संपत्ति विवाद और धोखाधड़ी के मामले एक सामाजिक चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भरोसे के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा भी जरूरी है।
जालंधर सिटी और देहात में सामने आ रही शिकायतें यह संकेत देती हैं कि अब एनआरआई परिवारों को केवल बाहरी लोगों से नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों से जुड़े मामलों में भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि कई बार सबसे बड़ा झटका वहां से मिलता है, जहां भरोसा सबसे ज्यादा होता है।