दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
देशभर में परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की और इस्तीफे का कारण भी विस्तार से बताया।
अपने पत्र में प्रधान ने लिखा कि पिछले चार दशकों से अधिक समय से वे छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उनका मानना है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही राष्ट्र की प्रगति की नींव है।
उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें मिलते ही सरकार ने तुरंत कदम उठाए। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की घोषणा की गई।
प्रधान ने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारू रूप से संपन्न कराना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। केंद्र, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक हुई। 16 जुलाई को आए परिणामों में गरीब और वंचित परिवारों के कई मेधावी छात्र सफल हुए। हालांकि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख हुआ।
उन्होंने आगे लिखा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित कर दिया। यह उनके व्यक्तिगत सम्मान का सवाल नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का मुद्दा है। वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों और राजनीतिक टकराव में उलझे या उनका ध्यान पढ़ाई से भटके। इसी भावना से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आगे भी वे भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से काम करते रहेंगे।