जालंधर। शहर में घर-घर पहुंचने वाले दूध की गुणवत्ता को लेकर एक स्टिंग वीडियो ने सवाल खड़े कर दिए हैं। बस्ती पीर दाद रोड इलाके में बनाए गए इस वीडियो में एक दूध सप्लायर से दूध में पानी मिलाने को लेकर बातचीत की गई। वीडियो में सप्लायर कथित तौर पर 28 किलो भैंस के दूध में करीब 12 किलो पानी मिलाने की बात स्वीकार करता नजर आ रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविकता दूध के नमूने की प्रयोगशाला जांच और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकती है।
65 से 75 रुपए में खरीदने का दावा, 65-70 रुपए में बिक्री की बात
स्टिंग के दौरान सप्लायर से दूध की खरीद और बिक्री के बारे में सवाल किया गया। वीडियो में वह कथित तौर पर बताता है कि उसे दूध करीब 65 से 75 रुपए प्रति किलो की दर से मिलता है। इसके बाद दूध में पानी मिलाकर उसे आगे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। सप्लायर के कथित बयान के मुताबिक, पानी मिलाने के बाद भी दूध करीब 65 से 70 रुपए प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है।
मुनाफे के लिए मिलावट का आरोप
वीडियो में सप्लायर से जब पूछा गया कि दूध में पानी क्यों मिलाया जाता है, तो कथित तौर पर उसने मुनाफे का हवाला दिया। बातचीत में यह भी सामने आता है कि दूध में पानी मिलाने से मात्रा बढ़ जाती है और इसी अतिरिक्त मात्रा से कमाई होती है। हालांकि वीडियो में कही गई बातों की सत्यता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बिना नहीं की जा सकती।
जमशेर खास में भी मिलावट के आरोप
देव डेयरी के संचालक मनप्रीत मंगू ने दावा किया कि जमशेर खास इलाके में भी दूध में पानी मिलाने का खेल चल रहा है। उनका आरोप है कि दूध को ड्रमों में भरकर आगे सप्लाई किया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों के आने से पहले कुछ दूध विक्रेताओं को सूचना मिल जाती है, जिसके कारण मिलावटी दूध को मौके से हटा दिया जाता है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक ड्रम में पानी डालकर बढ़ाई जा रही मात्रा का आरोप
स्टिंग में दूध की मात्रा बढ़ाने का कथित गणित भी सामने आया। दावा किया गया कि 30 किलो दूध में करीब 20 लीटर पानी मिलाकर कुल मात्रा 50 लीटर तक कर दी जाती है। यदि ऐसा किया जाता है तो ग्राहक जिस कीमत पर दूध खरीदता है, उसके बदले उसे वास्तविक दूध की मात्रा काफी कम मिलती है। यही वजह है कि दूध की गुणवत्ता और फैट की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच पर उठे सवाल
दूध में पानी मिलाने के आरोप सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। आमतौर पर त्योहारों के दौरान दूध, पनीर, खोया और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं, लेकिन रोजाना घरों तक पहुंचने वाले दूध की नियमित जांच कितनी प्रभावी है, यह भी जांच का विषय है। दूध के फैट, एसएनएफ और अन्य गुणवत्ता मानकों की मौके पर जांच होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पानी मिलाने से घटती है पोषण क्षमता
दूध में अधिक मात्रा में पानी मिलाने से उसकी पोषण गुणवत्ता कम हो जाती है। इसमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम, वसा और अन्य पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा प्रति गिलास घट जाती है। यदि पानी स्वयं दूषित हो तो स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा हो सकता है। वहीं किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ की मिलावट पाए जाने पर मामला और गंभीर हो जाता है। हालांकि यूरिया, डिटर्जेंट या अन्य रसायनों की मिलावट के दावे को बिना प्रयोगशाला जांच के सही नहीं माना जा सकता।
घर पर दूध की जांच को लेकर सावधानी जरूरी
दूध की गुणवत्ता को लेकर घर पर किए जाने वाले कुछ पारंपरिक परीक्षण केवल शुरुआती संकेत दे सकते हैं, उन्हें अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। दूध में पानी की मात्रा, फैट और अन्य मिलावट की सही जानकारी के लिए प्रमाणित प्रयोगशाला जांच जरूरी है। उपभोक्ताओं को शक होने पर दूध का नमूना सुरक्षित रखकर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से शिकायत करनी चाहिए।
स्टिंग ने बढ़ाई जांच की मांग
बस्ती पीर दाद रोड के स्टिंग वीडियो में सामने आए कथित बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग दूध के नमूने लेकर इसकी वैज्ञानिक जांच करेगा। यदि नमूने में तय मानकों से अधिक पानी या किसी अन्य पदार्थ की मिलावट मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल स्टिंग वीडियो में किए गए दावों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।