दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
शहर में दूध की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच लगातार दूसरे दिन दूध में पानी मिलाने का एक और वीडियो सामने आया है। देव डेयरी के संचालक मनप्रीत मंगू की ओर से बनाए गए इस वीडियो में डेयरी कर्मचारियों द्वारा दूध में पानी मिलाए जाने का दावा किया गया है। इससे पहले भी बस्ती पीर दाद रोड इलाके से सामने आए वीडियो में 28 किलो दूध में 18 किलो पानी मिलाने की बात सामने आने का दावा किया गया था।
दो दिन के वीडियो विभाग को सौंपने की तैयारी
मनप्रीत मंगू का कहना है कि पिछले दो दिनों में बनाए गए दोनों वीडियो खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन को सौंपे जाएंगे। उनका कहना है कि वीडियो के आधार पर संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच करें और यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि दूध जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली खाद्य वस्तु की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
28 किलो दूध में 18 किलो पानी मिलाने का दावा
पहले वीडियो में बस्ती पीर दाद रोड पर एक दूध सप्लायर से दूध की कीमत और उसमें पानी मिलाने को लेकर सवाल किए गए थे। वीडियो के आधार पर दावा किया गया कि सप्लायर 28 किलो भैंस के दूध में करीब 18 किलो पानी मिलाने की बात कर रहा था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभागीय जांच के बाद ही दूध में मिलावट की वास्तविक मात्रा स्पष्ट हो सकेगी।

जमशेर खास में भी लगाए गए आरोप
डेयरी संचालक ने जमशेर खास इलाके में भी दूध में पानी मिलाए जाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शाम के समय दूध में पानी मिलाकर उसे ड्रमों के माध्यम से आगे सप्लाई किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं। उन्होंने कुछ मामलों में कार्रवाई से पहले सूचना पहुंचने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बोले- शुद्ध दूध पहुंचाना डेयरी संचालकों की जिम्मेदारी
मनप्रीत मंगू ने कहा कि दूध बेचने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि ग्राहकों तक गुणवत्तापूर्ण दूध पहुंचे। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अधिक मात्रा में पानी मिलाकर दूध की सप्लाई करता है तो इससे ग्राहक को आर्थिक नुकसान के साथ दूध के पोषण में भी कमी आती है। उन्होंने मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
सप्लाई रूट और बिक्री केंद्रों की भी हो जांच
डेयरी संचालक ने दूध की जांच केवल डेयरी तक सीमित रखने के बजाय सप्लाई की पूरी व्यवस्था की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दूध की फैट और गुणवत्ता की जांच के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि दूध किन माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंच रहा है। इससे मिलावट के स्रोत का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
पानी मिलाने से घटती है दूध की गुणवत्ता
दूध में अधिक मात्रा में पानी मिलाने पर उसकी फैट और अन्य पोषक तत्वों की सांद्रता कम हो जाती है। यदि मिलावट के लिए इस्तेमाल किया गया पानी साफ नहीं है तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी हो सकता है। हालांकि किसी विशेष दूध में किस स्तर की मिलावट हुई है, इसकी पुष्टि केवल अधिकृत जांच के बाद ही की जा सकती है।
अब विभागीय जांच से खुलेगा पूरा मामला
लगातार दूसरे दिन सामने आए वीडियो के बाद मामला खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन तक पहुंचाने की तैयारी है। वीडियो में लगाए गए दावों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दूध में वास्तव में पानी मिलाया गया था या नहीं और यदि मिलावट हुई तो इसमें कौन लोग शामिल थे। अब निगाहें विभागीय कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।