दोआबा न्यूज़लाइन : जालंधर (सतपाल शर्मा)
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने बढ़ते ईंधन संकट से निपटने के लिए कई सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने देश में खर्चों में कटौती और ऊर्जा बचत योजना लागू करने की घोषणा की है, जिससे स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
सरकार द्वारा घोषित उपायों के तहत सरकारी कार्यालय अब हफ्ते में केवल चार दिन ही खुलेंगे। इसके साथ ही कई विभागों में “वर्क फ्रॉम होम” नीति लागू की गई है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। इसके अलावा देशभर में स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद करने का फैसला भी लिया गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य तेल संकट के बीच संसाधनों की बचत करना है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस समय पूरा क्षेत्र युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि बढ़ते संकट के कारण देश को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अचानक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। पाकिस्तान का तेल आयात मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारी विभागों को मिलने वाले ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत तक कटौती करने का निर्णय लिया है। अगले दो महीनों तक सरकारी विभागों के वाहनों को मिलने वाली तेल आपूर्ति आधी कर दी जाएगी। इसके अलावा इस अवधि के दौरान लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहन सड़कों पर नहीं चलेंगे।
सरकार ने खर्चों में कमी लाने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि मंत्रिमंडल के सदस्य, मंत्री, सलाहकार और विशेष सहायक अगले दो महीनों तक वेतन नहीं लेंगे। इसके अलावा सांसदों के वेतन में 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। वहीं ग्रेड-20 से ऊपर के उन अधिकारियों के वेतन में दो दिन की कटौती की जाएगी जिनकी मासिक आय तीन लाख रुपये से अधिक है।
प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने क्षेत्रीय तनाव को लेकर चिंता जताते हुए ईरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा भी की। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत पर दुख व्यक्त किया और खाड़ी देशों पर हुए हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष से वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए देश को सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने जनता को आश्वासन दिया कि सरकार अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और देश को इस संकट से बाहर निकालने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।