अमेरिकी अधिकारियों ने हमले को बताया रक्षात्मक कदम, तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हलचल
दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार को एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बन गई। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से अहम क़ेश्म द्वीप को निशाना बनाते हुए सीमित हवाई हमले किए। इस घटनाक्रम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी अधिकारियों ने कार्रवाई के पीछे बताई सुरक्षा वजह
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने हमले की पुष्टि करते हुए इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताया। अधिकारियों का कहना है कि ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य संसाधनों को निशाना बनाने की संभावित गतिविधियों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। हालांकि, इसे व्यापक सैन्य अभियान की शुरुआत नहीं बताया गया है।
ईरानी द्वीप पर धमाकों की खबर
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने क़ेश्म द्वीप पर धमाकों की जानकारी दी थी। यह द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक स्थित है और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, हमले में सैन्य प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान, नागरिक संपत्ति के प्रभावित होने या किसी व्यक्ति के हताहत होने के संबंध में अभी स्पष्ट आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
बातचीत के प्रयासों के बीच बढ़ा सैन्य टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी संपर्क की कोशिशें जारी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के माध्यम से तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समझौते की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।
तेल बाजार पर भी पड़ सकता है असर
इस घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। रॉयटर्स के मुताबिक, हमले की खबर के बाद एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.5 प्रतिशत बढ़कर 105.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 96.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार में कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित सैन्य टकराव और तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा पहुंचती है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी असर पड़ सकता है।
दुनिया की नजरें ईरान की अगली प्रतिक्रिया पर
अमेरिकी कार्रवाई के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की प्रतिक्रिया पर है। यदि दोनों देशों के बीच जवाबी सैन्य कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ता है तो पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है। फिलहाल हमले के वास्तविक नुकसान और ईरान की ओर से संभावित जवाब को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।