रूस और पाकिस्तान के नेताओं से की बातचीत, America-israel को बताया संघर्ष का कारण
दोआबा न्यूजलाइन (सतपाल शर्मा):
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Masoud Pezeshkian ने कहा है कि उनका देश क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए कुछ शर्तों को पूरा करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत “यहूदी शासन और अमेरिका” की वजह से हुई है और यह तभी खत्म हो सकता है जब ईरान के अधिकारों को मान्यता दी जाए।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि उन्होंने हाल ही में रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है। इस बातचीत में उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए तीन मुख्य शर्तें हैं—ईरान के कानूनी अधिकारों को मान्यता दी जाए, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में किसी भी हमले को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।
ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। Russia लगातार ईरानी नेतृत्व के संपर्क में है और संघर्ष को समाप्त करने की अपील कर रहा है। वहीं कई अन्य देश भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन वह दबाव में झुकने वाला नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान के अधिकारों को मान्यता नहीं दी गई तो संघर्ष जारी रह सकता है। उनके इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ईरान इतनी मजबूती के साथ अपनी बात कैसे रख रहा है।
मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Kabir Taneja का कहना है कि ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से ईरान कुछ समय तक युद्ध जारी रखने की स्थिति में हो सकता है। उनका मानना है कि ईरान की राजनीतिक और वैचारिक संरचना में अमेरिका विरोधी भावना लंबे समय से मौजूद है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से यह भावना ईरान की राजनीतिक विचारधारा का अहम हिस्सा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार दूसरा कारण नेतृत्व की राजनीतिक मजबूती से जुड़ा है। हालिया घटनाओं के बाद देश में सत्ता संरचना को मजबूत करने के लिए युद्धकालीन माहौल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे राजनीतिक नेतृत्व को विभिन्न गुटों का समर्थन हासिल करने में मदद मिलती है।
तीसरा कारण ईरान की सैन्य संरचना से जुड़ा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के लिए हाल की घटनाएं चुनौतीपूर्ण रही हैं। इसलिए संगठन के लिए अपनी ताकत और प्रभाव बनाए रखना भी एक अहम मुद्दा बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक प्रयास तेज जरूर हुए हैं, लेकिन जब तक सभी पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंचते, तब तक क्षेत्र में तनाव बना रहने की आशंका बनी रहेगी।