दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। ईरान द्वारा लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ऐसी खबरें सामने आई हैं कि कई अमेरिकी सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद अमेरिकी सैनिकों को मजबूर होकर खाड़ी देशों के होटलों और दफ्तरों में शरण लेनी पड़ी है।
ईरान का अल्टीमेटम: होटल मालिकों को सीधी चेतावनी
ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को कड़ी चेतावनी दी है। उसका कहना है कि अगर इन होटलों में अमेरिकी सैनिकों को ठहराया गया, तो ये स्थान उसकी सैन्य कार्रवाई का सीधा निशाना बन सकते हैं।
विदेश मंत्री का बयान: ‘मानव ढाल बना रहे अमेरिकी सैनिक’
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आरोप लगाया कि अमेरिकी सैनिक सैन्य ठिकानों से भागकर नागरिक इलाकों में छिप रहे हैं और आम लोगों को “मानव ढाल” के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
खाड़ी देशों से अपील: अमेरिकी नीति अपनाने की मांग
अराघची ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों से अपील की है कि वे अमेरिका की तरह नीति अपनाएं, जहां संभावित खतरे वाले व्यक्तियों को होटल बुकिंग देने से मना कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के होटल भी ऐसी ही सावधानी बरतें।
रिपोर्ट्स का दावा: नागरिक इलाकों में अमेरिकी मौजूदगी
समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्यकर्मी अब मिडिल ईस्ट के कई नागरिक इलाकों में मौजूद हैं। इनमें बेरूत के पुराने एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक बेस, दमिश्क का रिपब्लिक पैलेस, फोर सीजंस और शेरेटन होटल जैसे स्थान शामिल बताए जा रहे हैं।
संघर्ष का बढ़ता दायरा
ईरान और उसके सहयोगी समूहों द्वारा संयुक्त ऑपरेशन के चलते पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि संघर्ष अब सैन्य ठिकानों से निकलकर नागरिक क्षेत्रों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया है।