दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजारों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। मिडिल ईस्ट में संभावित युद्ध की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक ने चेतावनी दी है कि हालात बिगड़े तो तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
1. ब्लैकरॉक CEO की बड़ी चेतावनी
बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में लैरी फिंक ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। यदि अमेरिका-ईरान तनाव थमता नहीं है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। उन्होंने साफ कहा कि तेल की कीमतों में तेज उछाल पूरी दुनिया के लिए आर्थिक संकट का संकेत हो सकता है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
फिंक ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र किया, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। यदि इस अहम रूट पर कोई संकट आता है, तो सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
3 150 डॉलर तेल का असर: महंगाई और मंदी
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। उत्पादन लागत बढ़ेगी, कंपनियों पर दबाव आएगा और कई देशों की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ सकती है। ऐसी स्थिति वैश्विक मंदी का कारण बन सकती है।
3. सीजफायर के बाद भी खतरा बरकरार
लैरी फिंक के अनुसार, अगर युद्धविराम भी हो जाता है, लेकिन ईरान से जुड़े जोखिम बने रहते हैं और होर्मुज में तनाव जारी रहता है, तो तेल की कीमतें लंबे समय तक 100-150 डॉलर के बीच बनी रह सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद नकारात्मक होगी।
4. भारत जैसे देशों पर सीधा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा और महंगाई दर में तेजी आएगी।
5.कूटनीतिक समाधान पर टिकी दुनिया की नजर
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जल्द कूटनीतिक समाधान निकलता है या संकट और गहराता है।