लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने और 2029 से 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए तीन बड़े विधेयक पेश होंगे
दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
देश की राजनीति में बड़े बदलाव की पृष्ठभूमि तैयार हो चुकी है। संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है, जिसमें केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लागू करने और सीटों के नए संतुलन के लिए तीन अहम संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इन प्रस्तावों को आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज
सरकार 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को पूरी तरह लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नए प्रस्तावों के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की योजना है, जिसे 2029 से लागू किया जा सकता है। इसके साथ ही संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव
सरकार ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं। इस बदलाव का मकसद बढ़ती जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है।
परिसीमन से बदलेंगे राजनीतिक समीकरण
इन विधेयकों का सबसे अहम और जटिल हिस्सा परिसीमन है, जिसके जरिए लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इससे राज्यों के बीच राजनीतिक ताकत का नया संतुलन बनेगा। प्रस्ताव के अनुसार सैकड़ों सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
तीन दिन तक संसद में होगी लंबी बहस
16, 17 और 18 अप्रैल को इन विधेयकों पर संसद के दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा होगी। लोकसभा में करीब 18 घंटे और राज्यसभा में लगभग 10 घंटे बहस के लिए निर्धारित किए गए हैं। सरकार को इन बिलों को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जिसके चलते सभी दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है।
कौन-कौन से बिल होंगे पेश
सरकार तीन प्रमुख विधेयक पेश करेगी—
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026
- परिसीमन विधेयक 2026
इनका उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करना, संसद की सीटें बढ़ाना और नए सिरे से सीमांकन करना है।
विपक्ष का विरोध, उठाए कई सवाल
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिसीमन के जरिए राज्यों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है, खासकर दक्षिण और उत्तर भारत के बीच राजनीतिक प्रभाव में अंतर आ सकता है। विपक्ष का यह भी तर्क है कि सरकार को नए जनगणना आंकड़ों का इंतजार करना चाहिए था, बजाय पुराने आंकड़ों के आधार पर इतना बड़ा फैसला लेने के।
राजनीति की दिशा बदलने वाला कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ये विधेयक सिर्फ कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि देश की राजनीति की संरचना को बदलने वाले कदम साबित हो सकते हैं। महिला भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ सीटों का नया संतुलन भविष्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।