दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजीव अरोड़ा के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 100 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित फर्जी आईफोन एक्सपोर्ट और मनी लॉन्ड्रिंग (धर्नाशोधन निवारण अधिनियम – PMLA) मामले में गुरुग्राम की अदालत के समक्ष 30,000 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) दाखिल की है। ED ने अपनी गहन वित्तीय तफ्तीश के आधार पर संजीव अरोड़ा को इस पूरे संगठित सिंडिकेट का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड घोषित किया है।
9 मई से जेल में बंद हैं मंत्री, 55 करोड़ की संपत्ति कुर्क
इस हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए ED की टीमों ने इसी साल 9 मई 2026 को संजीव अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर लंबी छापेमारी की थी। मैराथन पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों को कब्जे में लेने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आरोपी कैबिनेट मंत्री फिलहाल गुरुग्राम की भौंडसी जेल में न्यायिक हिरासत के तहत बंद हैं। जेल में रहते हुए अरोड़ा ने अपनी नियमित जमानत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस कार्रवाई के समानांतर, ED अब तक मंत्री से जुड़ी 55 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) भी कर चुकी है।
कागजों पर 44,000 आईफोन का खेल: शेल कंपनियों का भंडाफोड़*
अदालत में पेश किए गए आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरा मामला एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी है, जिसमें अवैध रूप से अर्जित काली कमाई (Proceeds of Crime) को बैंकिंग चैनलों के जरिए सफेद करने का खेल रचा गया था:
- फर्जी निर्यात और 43 शिपिंग बिल: संजीव अरोड़ा की कंपनी HSRL (हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड) ने कथित तौर पर दुबई की एक फर्म को 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लगभग 44,000 आईफोन निर्यात करने का दावा किया था। जांच एजेंसी ने तफ्तीश के दौरान 43 ऐसे शिपिंग बिलों को ट्रैक किया है, जिसके जरिए 102,99,21,974 रुपये की अपराध से अर्जित आय का पुख्ता पता चला है।
- 9 अस्तित्वहीन फर्में और लेयरिंग: धरातल पर वास्तव में किसी मोबाइल फोन का कोई एक्सपोर्ट नहीं हुआ था। इसके लिए 9 प्रमुख सप्लायर कंपनियों का एक कागजी जाल बुना गया था, जिनमें एसके एंटरप्राइजेज, ग्लोबल ट्रेडर्स, वर्ल्डवाइड इलेक्ट्रॉनिक्स, जीएमजी ट्रेडलिंक, श्री लक्ष्मी एंटरप्राइजेज, मोबाइल स्टाइल, यूएस एंटरप्राइजेज, अंजनी इंटरनेशनल और मारुति नंदन टेलीकॉम एलएलपी शामिल हैं। ये सभी शेल या एंट्री ऑपरेटर फर्में थीं, जिनका इस्तेमाल नकदी के बदले धन की परतें (Layering) बनाने के लिए किया गया।
- फर्जी टर्नओवर और रिफंड स्कैम: इस फर्जी खरीद-बिक्री के जरिए कंपनियों का कुल टर्नओवर 150 करोड़ रुपये से अधिक दिखाया गया था। इसका मुख्य मकसद सरकारी खजाने को चूना लगाकर अवैध तरीके से करोड़ों रुपये का जीएसटी (GST) रिफंड हासिल करना था।
ED के 3 सबसे बड़े और पुख्ता सबूत*
जांच एजेंसी ने संजीव अरोड़ा के खिलाफ अदालत में निम्नलिखित मजबूत डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं:
- ICICI बैंक खाते का सिग्नेचर: हालांकि HSRL का मुख्य कारोबार रियल एस्टेट का था, लेकिन मोबाइल डिवीजन के लिए खोले गए आईसीआईसीआई बैंक खाते के ऑथराइज्ड सिग्नेटरी (अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता) खुद संजीव अरोड़ा थे। इसी खाते में लगभग 102.50 करोड़ रुपये की संदिग्ध निर्यात राशि प्राप्त हुई थी।
- समान मोबाइल नंबर और ईमेल: घोटाले में शामिल कई सप्लायर कंपनियों के आधिकारिक दस्तावेजों में एक जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज मिले हैं, जिससे साबित होता है कि यह पूरा सिंडिकेट एक ही नियंत्रण कक्ष से संचालित हो रहा था।
- दुबई कनेक्शन: जिस दुबई की कंपनी को 100 करोड़ से अधिक के आईफोन बेचने का दावा किया गया, वह विदेशी कंपनी खुद संजीव अरोड़ा की भारतीय रियल एस्टेट फर्म में एक निवेशक (Investor) के रूप में जुड़ी हुई पाई गई है।
व्यवसाय से सत्ता के शिखर तक का सफर*
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिरे संजीव अरोड़ा पंजाब की सियासत और बिजनेस जगत में एक बड़ा रसूख रखते हैं:
- व्यावसायिक पृष्ठभूमि: राजनीति में कदम रखने से पहले वे पंजाब के एक स्थापित और बड़े उद्योगपति थे। वे ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ (Hampton Sky Realty Limited) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (CMD) के पद पर कार्यरत थे।
- राजनीतिक कद: आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद, उन्हें 10 अप्रैल 2022 को राज्यसभा सांसद बनाकर भेजा गया। इसके बाद, मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार में उन्हें उद्योग और स्थानीय निकाय (Local Bodies) जैसे सबसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था।
चंडीगढ़ से दिल्ली तक गरमाई सियासत: तीखे वार-पलटवार
इस हाई-प्रोफाइल चार्जशीट के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है और दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है:
आम आदमी पार्टी (AAP) का आधिकारिक रुख:
पार्टी ने अपने कैबिनेट मंत्री का पुरजोर बचाव करते हुए इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है। AAP का आरोप है कि केंद्र सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते विपक्ष की आवाज दबाने के लिए ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का सरेआम दुरुपयोग कर रही है।भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पलटवार:
भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ED ने पुख्ता डिजिटल सबूतों, बैंक ट्रांजैक्शन और अकाट्य मनी ट्रेल के आधार पर चार्जशीट दाखिल की है। खुद को ‘कट्टर ईमानदार’ बताने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार का असली भ्रष्ट चेहरा अब पंजाब की जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
आगे क्या?
30 हजार पन्नों के इस विशाल वित्तीय लेखा-जोखा और गंभीर आरोपों के बाद, अब गुरुग्राम कोर्ट द्वारा इस अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने और आगामी कानूनी ट्रायल की प्रक्रिया पर पूरे देश की मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।