दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
बैसाखी और खालसा साजना दिवस के अवसर पर पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन कर लौटे सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज भारत पहुंचा। अटारी-वाघा सीमा पर परिजनों और संगतों की भारी भीड़ जमा हो गई, जहां अपनों से मिलकर भावुक पल देखने को मिले।
2238 श्रद्धालुओं का जत्था लौटा वतन
इस धार्मिक यात्रा में कुल 2238 श्रद्धालु शामिल थे, जो कई दिनों तक पाकिस्तान के विभिन्न पवित्र स्थलों पर मत्था टेककर वापस लौटे। सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

यात्रा को बताया बेहद सुखद
वापस लौटे श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पूरी यात्रा बेहद शांतिपूर्ण और यादगार रही। उन्होंने कहा कि उन्हें कहीं भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
पाकिस्तान में व्यवस्थाओं की सराहना
श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान सरकार और प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों की खुलकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि रहने, खाने और सुरक्षा के पूरे इंतजाम बेहतरीन थे, जिससे यात्रा और भी सहज बन गई।
पवित्र गुरुधामों में टेका माथा
इस दौरान जत्थे ने श्री ननकाना साहिब, श्री पंजा साहिब, श्री डेरा साहिब और श्री करतारपुर साहिब जैसे ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेका। श्रद्धालुओं ने बताया कि इन पवित्र स्थलों के दर्शन से उन्हें गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ।
और सुविधाएं बढ़ाने की मांग
श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों का आभार जताते हुए अपील की कि भविष्य में धार्मिक यात्राओं को और आसान बनाने के लिए अधिक कॉरिडोर खोले जाएं और सुविधाओं का विस्तार किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें।