होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर संकट, घरेलू गैस की बुकिंग में भी बढ़ा इंतजार
दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। Strait of Hormuz से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण देश में कमर्शियल गैस सिलेंडर (19 किलोग्राम) की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इस स्थिति से खास तौर पर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके रोजमर्रा के कामकाज में इन सिलेंडरों की अहम भूमिका होती है।
जानकारी के अनुसार, युद्ध और बढ़ते तनाव के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे गैस की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ गई है। इसका सीधा असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी पर पड़ा है। कई शहरों में होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि उनके पास गैस का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और नई सप्लाई नहीं मिलने से कामकाज प्रभावित हो रहा है।
रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो उन्हें अपने कारोबार को अस्थायी रूप से बंद करने तक की नौबत आ सकती है। खास तौर पर बड़े शहरों में फूड इंडस्ट्री पर इसका गहरा असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अधिकतर होटल और ढाबे खाना बनाने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों पर ही निर्भर होते हैं।
इस संकट का असर केवल कमर्शियल गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर भी आंशिक प्रभाव पड़ा है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग अब पहले की तरह 15 दिनों में नहीं मिल रही। उपभोक्ताओं को अब 21 से 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाजार में जमाखोरी या कालाबाजारी न हो। सरकार का कहना है कि जैसे ही आपूर्ति सामान्य होगी, गैस सिलेंडरों की सप्लाई भी सामान्य कर दी जाएगी।
बताया जा रहा है कि यह संकट खास तौर पर Maharashtra और Uttar Pradesh जैसे राज्यों में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां बड़ी संख्या में होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय गैस सिलेंडरों पर निर्भर हैं। कई व्यापार संगठनों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ भारत में गैस और ईंधन की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और आपूर्ति को जल्द सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।