दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
ढिल्लों ब्रदर्स आत्महत्या मामले में कपूरथला की अतिरिक्त सत्र अदालत ने तत्कालीन पुलिस अधिकारी नवदीप सिंह समेत तीन पुलिसकर्मियों को बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने नवदीप सिंह, बलविंदर कुमार और महिला कांस्टेबल जगजीत कौर को मामले से डिस्चार्ज कर दिया। अदालत के अनुसार उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए आवश्यक सामग्री सामने नहीं आती।
2023 में सामने आया था मामला
मामला अगस्त 2023 का है। 16 अगस्त को मानवजीत सिंह ढिल्लों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस कार्रवाई से उनका भाई जश्नबीर सिंह मानसिक रूप से परेशान हुआ। इसके अगले दिन, 17 अगस्त 2023 को जश्नबीर सिंह ने ब्यास नदी में छलांग लगा दी थी। बाद में नदी से उसका शव बरामद किया गया।
शव की पहचान कपड़ों और सामान से हुई
जश्नबीर सिंह का शव मिलने के बाद उसकी पहचान कपड़ों और अन्य सामान के आधार पर की गई। उपलब्ध अदालती विवरण के अनुसार डीएनए जांच निर्णायक नहीं रही, जबकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में मौत का कारण डूबने से दम घुटना बताया गया।
तीन पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ था मामला
घटना के बाद थाना तलवंडी चौधरियां में एफआईआर नंबर 52 दर्ज की गई। इसमें तत्कालीन पुलिस अधिकारी नवदीप सिंह, बलविंदर कुमार और जगजीत कौर को आरोपी बनाया गया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
बचाव पक्ष ने रखी यह दलील
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव पुरी ने अदालत में दलील दी कि जश्नबीर सिंह का आरोपियों के साथ सीधा संपर्क नहीं था। बचाव पक्ष ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह स्थापित नहीं होता कि आरोपियों ने जश्नबीर को आत्महत्या के लिए उकसाया या जानबूझकर ऐसा कोई कदम उठाया जिससे उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
अदालत ने क्या कहा
अदालत ने माना कि किसी व्यक्ति द्वारा आत्महत्या कर लेना और उससे पहले कोई पुलिस कार्रवाई होना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित नहीं करता। इसके लिए आरोपी की मंशा और ऐसा सकारात्मक कृत्य या आचरण सामने आना जरूरी है, जिसे आत्महत्या के लिए उकसाने से जोड़ा जा सके।
अदालत ने विशेष रूप से यह तथ्य देखा कि जश्नबीर सिंह का आरोपियों से सीधा संपर्क साबित नहीं हुआ। उपलब्ध सामग्री में ऐसा स्पष्ट संबंध भी सामने नहीं आया जिससे आरोपियों के किसी विशेष कृत्य को जश्नबीर की आत्महत्या के लिए सीधे जिम्मेदार ठहराया जा सके।
तीनों पुलिसकर्मियों को मिली राहत
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गुरमीत टिवाना की अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद नवदीप सिंह, बलविंदर कुमार और जगजीत कौर की डिस्चार्ज अर्जियां मंजूर कर दीं। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री को अभियोजन के पक्ष में स्वीकार करने पर भी आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते।