दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
जालंधर के कपूरथला चौक स्थित ‘गोल्डन टूल्स’ प्रतिष्ठान पर बुधवार देर रात कॉपीराइट व ट्रेडमार्क उल्लंघन की आशंका को लेकर भारी बवाल खड़ा हो गया। गुरुग्राम की एक नामी पावर टूल्स कंपनी की शिकायत पर पहुंची पुलिस और संबंधित फर्म के संचालक के बीच जबर्दस्त तकरार हुई, जिसमें थाना-2 की महिला एसएचओ (SHO) के साथ कारोबारी की नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

रेड के दौरान SHO और डिस्ट्रीब्यूटर में तीखी तकरार
कार्रवाई के दौरान थाना डिवीजन नंबर 2 की एसएचओ अनु पलियाल और गोल्डन टूल्स के संचालक आमने-सामने आ गए। वायरल फुटेज में एसएचओ यह कहती सुनाई दे रही हैं कि इतना डुप्लीकेट माल पकड़ा गया है, क्या इसे पूरे देश में खपाया जा रहा था? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अदालत के निर्देश पर शिकंजा कसा तो बचना मुश्किल होगा, साथ ही यह भी पूछा कि मामले की सूचना पहले सीधे उन्हें कॉल करके क्यों नहीं दी गई।

इस पर डिस्ट्रीब्यूटर ने पलटवार करते हुए कहा कि बिना किसी तकनीकी अथवा लैब टेस्ट के उत्पाद को नकली करार कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके गोदाम पर शराब पीकर घुसी लेबर और हमले के मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब कारोबारी ने पुलिस कमिश्नर (CP) सतिंदर सिंह के समक्ष पेश होने की बात कही, तो एसएचओ ने दो टूक जवाब दिया कि वह जहां चाहें जा सकते हैं, लेकिन पुलिस कार्य में दखल न दें और वह अपने जांच अधिकारी (IO) की रिपोर्ट के आधार पर ही कानूनी प्रक्रिया पूरी करेंगी।

गुरुग्राम की कंपनी का आरोप: 80 फीसदी माल फर्जी बेचा जा रहा था
गुरुग्राम से जालंधर पहुंची कंपनी की कानूनी टीम के प्रतिनिधि आशीष ने बताया कि उनकी टीम बुधवार सुबह से ही शहर में डेरा डाले हुए थी। पहले एक फर्जी खरीदार (डमी कस्टमर) भेजकर दुकान से कट-ऑफ व्हील और डायमंड सॉ ब्लेड जैसे उत्पाद खरीदे गए। जांच में पुष्टि हुई कि उत्पाद कंपनी के नाम और मार्का का गलत इस्तेमाल कर बनाए गए हैं। प्रतिनिधि का दावा है कि गोल्डन डिस्ट्रीब्यूटर पिछले 40 वर्षों से उनकी कंपनी से जुड़ा हुआ है, लेकिन हाल के समय में महज 20 प्रतिशत असली माल उठाकर बाकी 80 प्रतिशत बाजार में नकली उत्पादों की सप्लाई दे रहा था।
दुकानदार की सफाई: सभी खरीद के पक्के बिल मौजूद
दूसरी ओर, गोल्डन डिस्ट्रीब्यूटर के संचालक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि व्यापार पूरी तरह से वैध है और दुकान व गोदाम में रखे एक-एक सामान के खरीद बिल उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत उन्हें झूठे मामले में फंसाया जा रहा है।
पुलिस ने ट्रकों में माल भरवाया, ट्रेडमार्क एक्ट में केस दर्ज
विवाद और तीखी बहस के बावजूद पुलिस ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। देर रात संदिग्ध सामान को ट्रकों में लदवाकर थाने पहुंचाया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी के प्रतिनिधियों की तकनीकी जांच रिपोर्ट और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर ट्रेडमार्क उल्लंघन कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। मौके पर उपजे तनाव को शांत करवा दिया गया था और अब मामले की गहन जांच जारी है।