दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
बस्ती पीरदाद रोड पर वीरवार सुबह एक गद्दा निर्माण यूनिट में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। फैक्ट्री से निकलते घने काले धुएं और आग की ऊंची लपटों को देखकर आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। उस समय यूनिट में करीब 30 कर्मचारी काम कर रहे थे। आग फैलते ही सभी ने किसी तरह बाहर निकलकर खुद को सुरक्षित किया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

धुआं देखकर मची भगदड़
सुबह करीब 9 बजे फैक्ट्री परिसर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में आग तेजी से फैलने लगी। अंदर रखे गद्दे बनाने वाले कच्चे माल और अन्य सामग्री के कारण आग ने जल्द ही गंभीर रूप ले लिया। कर्मचारियों को जब हालात नियंत्रण से बाहर होते दिखाई दिए तो वे फैक्ट्री से बाहर निकल आए।
आग की गर्मी से ढांचा हुआ कमजोर
फैक्ट्री के भीतर मौजूद ज्वलनशील सामग्री ने आग की तीव्रता बढ़ा दी। तेज तापमान के कारण इमारत का शेड और लैंटर क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर गया। मलबा गिरने के बाद फायर कर्मियों के लिए अंदर जाकर आग के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो गया। इसके बावजूद टीमों ने अलग-अलग तरफ से पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोकने का प्रयास जारी रखा।
कई दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। एडीएफओ मनिंदर सिंह के मुताबिक, विभाग को लगभग 9:15 बजे आग की जानकारी मिली थी। इसके बाद करीब 8 से 10 दमकल वाहनों को मौके पर लगाया गया।
काफी देर तक चले ऑपरेशन के बाद आग के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर लिया गया। फायर कर्मियों ने आसपास के क्षेत्र में आग फैलने की आशंका को देखते हुए भी लगातार मोर्चा संभाले रखा।
बचाव के दौरान एक व्यक्ति गिरकर घायल
आग पर काबू पाने और आसपास की स्थिति को संभालने के दौरान एक व्यक्ति का पैर फिसल गया। वह नीचे गिरने से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया। हादसे में किसी कर्मचारी की मौत की सूचना नहीं है।
आग लगने की वजह अभी जांच का विषय
फैक्ट्री में आग किस कारण लगी, इसका अभी पुख्ता पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। फायर विभाग की टीम ने घटनास्थल पर स्थिति का निरीक्षण भी किया।
रिहायशी इलाके में औद्योगिक गतिविधि पर सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए। इलाके के निवासी केशव ने दावा किया कि यूनिट में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी रखे हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग गैस सिलेंडरों तक पहुंच जाती तो आसपास के घरों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।
लोगों ने यह भी कहा कि इस यूनिट में करीब 10 साल पहले आग की घटना हो चुकी है। उनके अनुसार उस समय फैक्ट्री को यहां से हटाकर केवल स्टोरेज के लिए इस्तेमाल करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में यहां फिर से निर्माण गतिविधियां शुरू हो गईं।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद लोगों ने मांग उठाई कि रिहायशी इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों और गोदामों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाए। विशेष रूप से ज्वलनशील केमिकल, गैस सिलेंडर और अन्य सामग्री रखने वाली इकाइयों के दस्तावेजों और फायर सेफ्टी इंतजामों की जांच की जाए।
स्थानीय लोगों ने पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी का आरोप भी लगाया और फैक्ट्री प्रबंधन की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हादसे की पूरी जांच कर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।