दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
पंजाब में सरकारी परिवहन व्यवस्था पर 22 सितंबर से असर पड़ सकता है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कांट्रैक्ट कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन के मुताबिक करीब 6500 कर्मचारी आंदोलन में शामिल होंगे। इससे राज्य में चलने वाली करीब 2700 बसों की सेवाएं प्रभावित होने की संभावना है।
कर्मचारियों की मुख्य मांग नौकरी पक्की करने की
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ठेके पर काम कर रहे कर्मचारी लंबे समय से नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। यूनियन के अनुसार इस मुद्दे पर सरकार के साथ कई बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ऐसा फैसला नहीं हुआ जिससे कर्मचारियों की समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।
बैठक रद्द होने के बाद बढ़ा विवाद
यूनियन नेताओं के अनुसार परिवहन विभाग के साथ बातचीत के कई प्रयास हुए हैं। 17 सितंबर को परिवहन मंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक भी नहीं हो सकी। इसके बाद कर्मचारियों ने सरकार पर गंभीरता से मांगों पर विचार नहीं करने का आरोप लगाते हुए हड़ताल का रास्ता अपनाने का फैसला किया।
पीएफ-ईएसआई व्यवस्था पर भी सवाल
कर्मचारी नेताओं ने ठेकेदारी प्रणाली के तहत मिलने वाले पीएफ और ईएसआई लाभों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े इन मामलों में पूरी पारदर्शिता नहीं है। संगठन ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त कर कर्मचारियों को सरकारी व्यवस्था के तहत लाने की मांग कर रहा है।
सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने की मांग
यूनियन ने प्रदेश में सरकारी बसों के बेड़े को मजबूत करने का मुद्दा भी उठाया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पुरानी बसों की संख्या बढ़ने के कारण परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। उनकी मांग है कि सरकार नई सरकारी बसें शामिल करे और निजी संचालकों से जुड़ी किलोमीटर योजना पर निर्भरता कम की जाए।
धरने और प्रदर्शन की भी तैयारी
हड़ताल शुरू होने के बाद कर्मचारी मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करने की भी घोषणा कर चुके हैं। यूनियन ने आंदोलन के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने तथा जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग भी रखी है।
सरकारी बसों पर निर्भर यात्रियों की बढ़ सकती है मुश्किल
हड़ताल लंबी चलती है तो रोजाना रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी से यात्रा करने वाले यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों और लंबी दूरी के रूटों पर इसका असर अधिक दिखाई देने की संभावना है। अब नजर सरकार और कर्मचारी यूनियन के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है।