दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
जालंधर कैंट स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए और अस्पताल के बाहर काफी देर तक हंगामा किया। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने के साथ जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का दावा- अस्पताल में सब ठीक बताया, बाद में दूसरे अस्पताल भेजा
परिजनों के अनुसार महिला को डिलीवरी के लिए प्रकृति अस्पताल लाया गया था। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने महिला की स्थिति सामान्य होने की बात कही थी। कुछ समय बाद अचानक उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। परिजनों का आरोप है कि महिला की वास्तविक स्थिति के बारे में उन्हें समय रहते स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
एंबुलेंस के पीछे पहुंचे परिजन, दूसरे अस्पताल में मिली मौत की जानकारी
महिला को एंबुलेंस से जोल अस्पताल ले जाया गया। परिवार के सदस्य भी उसके पीछे दूसरे अस्पताल पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद महिला और नवजात दोनों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने प्रकृति अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि उन्हें महिला की गंभीर स्थिति की सही जानकारी नहीं दी गई।
नौ साल बाद घर में आने वाली थी खुशी, मातम में बदली खुशियां
परिजनों ने बताया कि शादी के करीब नौ साल बाद परिवार को संतान की उम्मीद थी। महिला और बच्चे की एक साथ मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का कहना है कि यदि महिला की हालत गंभीर थी तो उन्हें समय रहते स्थिति से अवगत करवाया जाना चाहिए था और उचित उपचार उपलब्ध करवाया जाना चाहिए था।
₹35 हजार वापस करने की बात पर भड़का परिवार
परिजनों ने आरोप लगाया कि घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की ओर से इलाज के लिए जमा करवाई गई करीब 35 हजार रुपये की राशि वापस करने की बात कही गई। परिवार का कहना है कि इस रवैये से उन्हें और गहरा आघात लगा। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर विरोध शुरू कर दिया।
पुलिस ने पहुंचकर संभाला मामला, रिकॉर्ड कब्जे में लिया
हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों की शिकायत सुनी और अस्पताल से संबंधित रिकॉर्ड व रजिस्टर अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई तथा इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं।
परिजनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में अस्पताल या किसी चिकित्सक की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।