दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
चंडीगढ़ से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने चिकित्सा व्यवस्था की नैतिकता और मानवता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की युवा डॉक्टर प्रभलीन कौर ने एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में जॉइनिंग के पहले ही दिन इस्तीफा देकर सनसनी फैला दी है।
डॉ. प्रभलीन कौर ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों को बेहतर इलाज देने के बजाय उन्हें सिर्फ मुनाफा कमाने का जरिया मानता है। उनका कहना है कि अस्पताल को उनकी सेवाओं की नहीं, बल्कि उनके नाम और डिग्री की जरूरत थी, ताकि उनकी आड़ में संदिग्ध गतिविधियां चलाई जा सकें।
“ICU में जबरन भर्ती कर बढ़ाया जाता है बिल”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डॉ. कौर ने खुलासा किया कि अस्पताल की मालकिन, जो स्वयं गायनिकोलॉजिस्ट हैं, मरीजों के भर्ती होने का फैसला खुद लेती थीं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों पर दबाव बनाया जाता था कि मरीजों को बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के भी लंबे समय तक ICU में रखा जाए, ताकि मेडिकल बिल बढ़ाया जा सके।
डॉ. कौर ने स्पष्ट कहा, “मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार यह निर्णय फिजिशियन का होता है कि मरीज को ICU की जरूरत है या नहीं, लेकिन यहां केवल मुनाफा कमाना ही उद्देश्य था। गलत काम वे कर रहे थे, लेकिन हस्ताक्षर मेरे होने थे। मैंने तय किया कि मैं अपने कंधों पर किसी को बंदूक रखकर नहीं चलने दूंगी।”
नाम उजागर करने से किया इनकार, बताई मजबूरी
जब सोशल मीडिया पर लोगों ने अस्पताल का नाम पूछना शुरू किया, तो डॉ. कौर ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि उनके पास न तो राजनीतिक समर्थन है और न ही आर्थिक ताकत, इसलिए सीधे तौर पर नाम उजागर करना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है।
मानवाधिकार आयोग ने की सराहना
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पद्म श्री से सम्मानित और पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के सदस्य जतिंदर सिंह शंटी ने डॉ. प्रभलीन कौर के साहस की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इस युवा डॉक्टर ने निडरता से अस्पताल माफिया के चेहरे को उजागर किया है। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि आज कई निजी अस्पताल सेवा के बजाय व्यवसाय बन चुके हैं, जहां डॉक्टरों पर रेवेन्यू टारगेट का दबाव बनाया जाता है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते व्यवसायीकरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवता के नाम पर हो रहे इस कथित शोषण पर सख्त निगरानी और ठोस कार्रवाई की मांग अब तेज होती जा रही है।