दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
अमृतसर स्थित अटारी-वाघा सीमा से एक विशेष स्वर्ण पालकी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लिए रवाना की गई। यह पालकी पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारा ननकाना साहिब में श्रद्धालुओं की सेवा और धार्मिक आयोजनों के लिए भेजी गई है। पालकी को तैयार करने में भारतीय कारीगरों ने महीनों तक मेहनत की और इसे पारंपरिक सिख धार्मिक कला के अनुसार सजाया गया।
बताया जा रहा है कि सिंध से इस पालकी की मांग की गई थी, जिसके बाद धार्मिक संगठनों और सेवादारों के सहयोग से इसका निर्माण कराया गया। पालकी को रवाना करने से पहले अरदास की गई और श्रद्धालुओं ने गुरु घर की सेवा के रूप में इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
सीमा पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पालकी को पाकिस्तान भेजा गया, जहां इसे ननकाना साहिब में स्थापित किया जाएगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह पहल दोनों देशों के सिख समुदायों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगी।
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