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खाड़ी क्षेत्र में चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर अब धार्मिक स्थलों तक भी पहुंचने लगा है। अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में संगत को भेंट किए जाने वाले सिरोपा की तैयारी प्रभावित हुई है, जिससे प्रबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सिरोपा परंपरा पर पड़ा असर, कपड़े की कमी बनी वजह
श्री दरबार साहिब में रोजाना बड़ी संख्या में अखंड पाठ के भोग डाले जाते हैं, जिसके बाद श्रद्धालुओं को सिरोपा भेंट किया जाता है। यह परंपरा सिख आस्था का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन इस बार सिरोपा तैयार करने के लिए जरूरी कपड़े की सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है।
ऑर्डर अधूरा, सप्लायर ने जताई असमर्थता
सूत्रों के अनुसार, साल के अंत की जरूरतों को देखते हुए एक निजी फर्म को बड़ी मात्रा में कपड़े का ऑर्डर दिया गया था। हालांकि अब तक तय मात्रा का छोटा हिस्सा ही उपलब्ध हो पाया है। सप्लायर का कहना है कि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली विशेष सामग्री की कमी के चलते वे समय पर पूरा ऑर्डर देने में सक्षम नहीं हैं।
वैश्विक हालात से टूटी सप्लाई चेन
बताया जा रहा है कि सिरोपा तैयार करने की प्रक्रिया में एक विशेष रसायन का उपयोग होता है, जिसकी आपूर्ति विदेशों से होती है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण यह सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
लंगर व्यवस्था सामान्य, सिरोपा वितरण जारी रखने की कोशिश
हालांकि इस स्थिति का असर लंगर सेवा या श्रद्धालुओं की आमद पर नहीं पड़ा है। गुरु घर की परंपराओं को बनाए रखने के लिए प्रबंधन उपलब्ध स्टॉक से ही सिरोपा भेंट करने की कोशिश कर रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई आंच न आए।
प्रबंधन जुटा विकल्प तलाशने में
मौजूदा चुनौती को देखते हुए प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से निपटा जा सके। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं कि परंपराएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।