दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में 26 सितंबर को हुए हंगामे और आगजनी के मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब हिंसा के दौरान बने हालात के साथ-साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित उन संदेशों की भी पड़ताल कर रही है, जिनसे छात्रों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई। मामले में Reddit पर साझा की गई एक पोस्ट की कड़ी सामने आने के बाद पुलिस ने पोस्ट करने वाले अकाउंट से जुड़ी जानकारी जुटाई है। इस प्रकरण में अब तक 17 छात्रों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस का जोर हिंसा की वजह, सोशल मीडिया पर फैली जानकारी की सत्यता और घटनास्थल पर अलग-अलग लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।
वायरल पोस्ट के पीछे किसकी भूमिका, पुलिस कर रही पड़ताल
जांच के दौरान Reddit पर साझा की गई एक पोस्ट पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बनी है। पोस्ट में यूनिवर्सिटी में एक छात्रा से कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ी जानकारी प्रसारित होने की बात सामने आई थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पोस्ट किस आधार पर लिखी गई और उसमें किए गए दावों की पुष्टि के लिए क्या कदम उठाए गए थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी जानकारी को जांच के बिना सही नहीं माना जा सकता। इसी वजह से पुलिस पोस्ट की सामग्री और उसके प्रसार से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
तकनीकी जांच के सहारे अकाउंट तक पहुंची पुलिस
पोस्ट के स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी का सहारा लिया। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, Reddit से प्राप्त जानकारी के आधार पर संबंधित इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) पते की जांच की गई। इसके बाद पोस्ट साझा करने वाले अकाउंट से जुड़े व्यक्ति तक पहुंचने में मदद मिली। साइबर जांच के इस पहलू से पुलिस को घटनाक्रम की समय-सीमा और पोस्ट के प्रसार को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अकाउंट की पहचान होना और पोस्ट में किए गए दावों का सही या गलत होना दो अलग-अलग बातें हैं।
सुनी-सुनाई जानकारी पर पोस्ट लिखने की बात
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान संबंधित प्रथम वर्ष की छात्रा ने कथित तौर पर सुनी-सुनाई जानकारी के आधार पर पोस्ट साझा करने की बात कही। पुलिस इस बयान की अन्य साक्ष्यों के साथ जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती हैं कि पोस्ट को कितने लोगों ने देखा, क्या उसे अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया और उसका परिसर में बने माहौल से क्या संबंध था। जांच पूरी होने से पहले छात्रा की भूमिका या पोस्ट के प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
26 सितंबर को हिंसा और आगजनी से बिगड़े हालात
यूनिवर्सिटी परिसर में 26 सितंबर को हुए घटनाक्रम के दौरान हिंसा और आगजनी की सूचना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, इस दौरान तीन पुलिस वाहनों को आग लगाए जाने का मामला भी जांच में शामिल है। घटना के बाद पुलिस ने उपद्रव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और ड्यूटी में बाधा डालने जैसे आरोपों से संबंधित साक्ष्य जुटाए। हिंसा ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। अब पुलिस यह स्पष्ट करने में जुटी है कि घटनास्थल पर कौन-कौन मौजूद था और किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही।
17 छात्रों की गिरफ्तारी, अन्य आरोपितों की तलाश जारी
इस मामले में पुलिस अब तक 17 छात्रों की गिरफ्तारी की जानकारी दे चुकी है। जांच के दौरान उपलब्ध वीडियो, डिजिटल जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की भूमिका का आकलन किया जा रहा है। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस की टीमें अन्य आरोपितों की तलाश में भी कार्रवाई कर रही हैं। जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि हिंसा अचानक भड़की या इसके पीछे कोई संगठित गतिविधि थी। पुलिस प्रत्येक आरोपित की भूमिका और उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
पुलिसकर्मियों की शिकायतों पर दर्ज की गईं तीन एफआईआर
हिंसा के मामले में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की शिकायतों के आधार पर तीन एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें हिंसा, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोप शामिल बताए गए हैं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस अलग-अलग घटनाओं की जांच कर रही है। एफआईआर में दर्ज आरोप अपने आप में अपराध साबित होने का प्रमाण नहीं होते। संबंधित लोगों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
हाईकोर्ट में भी उठा सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी का मुद्दा
LPU हिंसा से जुड़ा मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी चर्चा में रहा। सुनवाई से संबंधित प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, कथित यौन उत्पीड़न के दावे और उसके बाद बने हालात को लेकर अदालत के समक्ष जानकारी रखी गई। रिपोर्टों में कथित घटना की पुष्टि नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे मामलों में किसी शिकायत की निष्पक्ष जांच और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों का तथ्यात्मक सत्यापन बेहद जरूरी है। जांच के निष्कर्ष आने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
अब जांच के निष्कर्षों पर टिकी निगाहें
LPU हिंसा मामले में अब पुलिस के सामने दो महत्वपूर्ण पहलू हैं—एक ओर आगजनी और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान करना, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी की उत्पत्ति और उसके प्रभाव की जांच करना। पुलिस की जांच से ही स्पष्ट होगा कि विवादित पोस्ट और हिंसा के बीच क्या संबंध था। फिलहाल 17 गिरफ्तारियों और Reddit पोस्ट से जुड़ी जांच ने मामले को नया मोड़ दिया है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों के निष्कर्ष और अदालत में पेश किए जाने वाले तथ्य इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में महत्वपूर्ण होंगे।