दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन E20 पेट्रोल को लेकर सरकार का प्रस्ताव चर्चा का प्रमुख विषय रहा। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर लंबी बहस हुई। इसके अलावा कर्मचारियों के डीए, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, बंदी सिखों की रिहाई, अधूरे विकास कार्यों, बाढ़ सुरक्षा, नीड-बेस्ड नीति और जंगली सूअरों की समस्या समेत कई जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा गया।
E20 पेट्रोल पर सरकार ने रखा प्रस्ताव
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में E20 पेट्रोल को लेकर प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि जिन वाहनों की तकनीक E20 ईंधन के अनुरूप नहीं है, उनके लिए अलग व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। ऐसे वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए और यदि किसी प्रकार की क्षति सामने आती है तो मुआवजे की व्यवस्था पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
विपक्ष ने E20 नीति पर उठाए कई सवाल
कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने कहा कि E20 नीति पर व्यापक चर्चा जरूरी है। उन्होंने पूछा कि राज्य में एथेनॉल उद्योग को कितना बढ़ावा मिला, किसानों को क्या लाभ हुआ और आम उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। विपक्ष ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और टैक्स व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया।
सरकार ने किसानों और उद्योग के हित गिनाए
सरकार की ओर से कहा गया कि एथेनॉल उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी। मंत्रियों ने यह भी कहा कि एथेनॉल का उपयोग केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि दवा और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल होता है। सरकार ने इसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम कदम बताया।
पेपर लीक विवाद पर मुख्यमंत्री का जवाब
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों पर कहा कि सरकार किसी भी तरह की अनियमितता के प्रति सख्त रुख अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि जहां भी परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की सूचना मिली, वहां तुरंत कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई मामलों में प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-फरोख्त की कोशिशें सामने आईं, जिन पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की।
डीए और कर्मचारियों के मुद्दे पर सरकार से जवाब तलब
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार क्या कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि सरकार फैसला लागू करेगी या फिर उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी। कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने का मामला भी सदन में प्रमुखता से उठा।
बंदी सिखों और सांसद अमृतपाल सिंह का मुद्दा भी गूंजा
अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने बंदी सिखों की रिहाई और पैरोल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जेलों में बंद कैदियों के मामलों पर सरकार को स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने सांसद अमृतपाल सिंह के मामले का उल्लेख करते हुए संबंधित विकास कार्यों और लंबित मामलों पर भी सरकार से जवाब मांगा।
बाढ़ सुरक्षा और विकास परियोजनाओं पर चिंता
सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों की समीक्षा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत योजनाओं और खर्च की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आएगी। वहीं अबोहर के विधायक संदीप जाखड़ और कांग्रेस विधायक अरुणा चौधरी ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरे विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं का मुद्दा उठाया।
नीड-बेस्ड नीति पर विपक्ष असंतुष्ट
मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह ने नीड-बेस्ड नीति को लेकर सरकार से स्पष्ट समयसीमा पूछी। सरकार ने बताया कि इस विषय पर समिति विचार कर रही है, लेकिन विपक्ष ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना और जल्द निर्णय लेने की मांग की।
जंगली सूअरों की समस्या भी पहुंची सदन
ग्रामीण इलाकों में जंगली सूअरों से किसानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी विधानसभा में उठा। सरकार ने कहा कि संबंधित विभाग समस्या के समाधान के लिए नियमानुसार कार्रवाई कर रहा है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
शेरो-शायरी और तीखी नोकझोंक के बीच चला सत्र
सदन की कार्यवाही के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कुछ सदस्यों ने अपने भाषणों में शेरो-शायरी और राजनीतिक टिप्पणियों का सहारा लिया। दिनभर चली चर्चा में सरकार ने अपनी नीतियों का बचाव किया, जबकि विपक्ष ने जनहित से जुड़े मुद्दों पर लगातार जवाब मांगे।