दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल से प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित
पंजाब के सरकारी विभागों में अपने व्यक्तिगत या व्यावसायिक कार्य करवाने की सोच रहे लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन के बैनर तले राज्य भर के क्लर्क और मिनिस्टीरियल कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले गए हैं। पहले दो दिन दफ्तरों में कलम छोड़ और कंप्यूटर बंद रखकर विरोध जताया जा रहा है, जबकि तीसरे दिन सभी कर्मचारी सामूहिक छुट्टी लेकर चंडीगढ़ में शक्ति प्रदर्शन करेंगे। यदि सरकार ने समय रहते सुध न ली, तो इस गतिरोध को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
यूनियन का कड़ा रुख और दफ्तरी कार्यप्रणाली पर पूर्ण विराम
संगठन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी कर्मचारी दफ्तर परिसर में मौजूद रहकर भी किसी प्रशासनिक फाइल को हाथ न लगाए। व्यवस्था बनाए रखने के लिए यूनियन की विशेष निगरानी समितियां विभिन्न विभागों में अचानक दौरा करेंगी और आदेश का उल्लंघन करने वालों का बहिष्कार किया जाएगा। क्लर्कों के काम रोक देने से वरिष्ठ अधिकारियों के टेबल तक भी फाइलें नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे पूरी सरकारी मशीनरी सुस्त पड़ गई है।
एक लाख से अधिक कर्मियों की एकजुटता और लंबे समय से अधूरी मांगें
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत एक लाख से अधिक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। यूनियन नेतृत्व का कहना है कि पूर्व में की गई बैठकों और आश्वासनों के बावजूद प्रशासन ने उनकी मांगों को लागू नहीं किया। प्रांतीय नेतृत्व का दावा है कि जब तक सरकार लिखित रूप से उनकी जायज मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती, तब तक यह दफ्तरी बंदी और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
जमीन-जायदाद के पंजीकरण और वाहनों के कागजात से जुड़े काम ठप
इस कार्य बहिष्कार का सबसे बड़ा असर जन-सुविधाओं पर पड़ा है। तहसीलों में जमीनों की रजिस्ट्री, इंतकाल, एनओसी और विभिन्न श्रेणी के सरकारी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट विभाग में नए वाहनों का पंजीकरण, आरसी, फिटनेस प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े तमाम प्रशासनिक कार्य अधर में लटक गए हैं।
चिकित्सा प्रमाणपत्रों पर रोक और सेवा केंद्रों में आवेदनों का अंबार
स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक ब्लॉक बंद रहने से सरकारी कर्मचारियों के मेडिकल बिलों का भुगतान, दिव्यांग प्रमाणपत्र और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस संबंधी फाइलें अटक गई हैं। दूसरी ओर, यद्यपि सेवा केंद्रों में जनता से आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित विभागों के क्लेरिकल स्टाफ द्वारा वेरिफिकेशन न किए जाने के कारण पेंडिंग फाइलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।