दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर (सतपाल शर्मा)
ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से RBI ने 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर नए सुरक्षा उपाय लागू करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम खासतौर पर Authorised Push Payment (APP) से जुड़े फ्रॉड को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई ग्राहक पहली बार किसी नए व्यक्ति या खाते में 10,000 रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर करता है, तो उस पर करीब एक घंटे का अनिवार्य ‘टाइम लैग’ लगाया जा सकता है। यानी पैसा तुरंत ट्रांसफर होने के बजाय एक घंटे तक रुका रहेगा। इस दौरान ग्राहक के पास ट्रांजैक्शन को रद्द करने का विकल्प रहेगा, जिससे किसी शक या गलती की स्थिति में पैसे को जाने से रोका जा सके।
RBI के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़े बताते हैं कि 10,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल धोखाधड़ी मामलों का करीब 45 प्रतिशत हैं, लेकिन रकम के हिसाब से इनकी हिस्सेदारी लगभग 98.5 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसी कारण इस श्रेणी पर विशेष फोकस किया गया है।
इसके अलावा, अगर कोई ट्रांजैक्शन संदिग्ध पाया जाता है तो बैंक ग्राहक से दोबारा पुष्टि कर सकता है और संभावित फ्रॉड को लेकर अलर्ट भी जारी करेगा। इससे समय रहते धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।
हालांकि, ये नियम मर्चेंट पेमेंट जैसे UPI से खरीदारी, ई-मैंडेट और चेक के जरिए होने वाले भुगतान पर लागू नहीं होंगे। ग्राहकों की सुविधा के लिए ‘व्हाइटलिस्टिंग’ का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे वे भरोसेमंद खातों को पहले से मंजूरी देकर इस देरी से बच सकते हैं।
RBI का मानना है कि ये नए सुरक्षा उपाय डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाएंगे और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में कमी लाने में मददगार साबित होंगे।