दोआबा न्यूजलाइन । जालंधर (सतपाल शर्मा)
अमृतसर: बैसाखी और खालसा साजना दिवस के मौके पर पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन के लिए रवाना हुए श्रद्धालुओं के जत्थे को अटारी-वाघा बॉर्डर पर उस समय झटका लगा, जब करीब 27 श्रद्धालुओं को सीमा पार करने से रोक दिया गया। इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में निराशा और रोष देखने को मिला।
जानकारी के मुताबिक, बॉर्डर पर जांच के दौरान सामने आया कि कुछ श्रद्धालुओं के नाम अंतिम स्वीकृति सूची में दर्ज नहीं थे। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं यात्रियों को आगे जाने की अनुमति दी जा सकती है, जिनके नाम अधिकृत सूची में शामिल हों। इस वजह से संबंधित श्रद्धालुओं को रोकना पड़ा, जबकि बाकी जत्था निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ गया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास वैध वीजा और जरूरी कागजात मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें रोका जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका आरोप है कि प्रक्रिया में तालमेल की कमी के कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
अव्यवस्था से बढ़ी यात्रियों की चिंता
इस घटना से खासकर उन परिवारों को अधिक दिक्कत हुई, जो बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा पर निकले थे। अचानक आई इस रुकावट ने उनकी यात्रा योजना को प्रभावित कर दिया। प्रभावित लोगों ने मांग की है कि भविष्य में यात्रियों की सूची और मंजूरी प्रक्रिया को पहले से ही स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल, रोके गए श्रद्धालु अधिकारियों के अगले निर्देश का इंतजार कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही उन्हें भी यात्रा की अनुमति मिल सकेगी।