दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर (सतपाल शर्मा)
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका की ओर से कड़े संकेत मिल रहे हैं कि यदि समुद्री मार्ग को लेकर उसकी शर्तें नहीं मानी गईं तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह दबाव में झुकने वाला नहीं है, जिससे हालात और ज्यादा विस्फोटक बनते जा रहे हैं।
तेल आपूर्ति पर असर का खतरा, दुनिया की नजरें खाड़ी क्षेत्र पर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही सैन्य गतिविधियां बढ़ चुकी हैं। अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि ईरान भी अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत कर रहा है।
कूटनीति नाकाम, बयानबाजी ने बढ़ाई दूरी
दोनों देशों के बीच बातचीत के प्रयास फिलहाल नाकाम नजर आ रहे हैं। जहां अमेरिका दबाव की रणनीति अपना रहा है, वहीं ईरान इसे एकतरफा और अनुचित बताते हुए खारिज कर चुका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की तीखी बयानबाजी से कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर होती जा रही हैं। अगर जल्द कोई मध्यस्थता नहीं हुई तो हालात सीधे सैन्य टकराव में बदल सकते हैं, जिसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया को झेलना पड़ सकता है।
आने वाले 48 घंटे अहम
अब सबकी नजर अगले 48 घंटों पर टिकी हुई है। यही वह समय है जिसमें यह तय होगा कि मामला बातचीत की टेबल तक लौटेगा या फिर हालात और ज्यादा बिगड़ेंगे।
मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि यह सिर्फ दो देशों का विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा संकट बन चुका है।