दोआबा न्यूजलाइन ।सतपाल शर्मा
मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। 17 अप्रैल से लागू युद्धविराम के बावजूद इज़रायल और लेबनान के बीच सीमा पर लगातार धमाकों और हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। हालात ऐसे हैं कि शांति समझौता ज़मीनी हकीकत में नज़र ही नहीं आ रहा।
सीमा पर लगातार टकराव, आम लोगों की जान जोखिम में
दक्षिणी लेबनान में हालिया हमलों ने एक बार फिर नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई इलाकों में हुए एयरस्ट्राइक के बाद मलबे से शव निकालने का सिलसिला जारी है। स्थानीय राहत टीमों के मुताबिक, हमलों में मासूम बच्चों सहित कई लोग मारे गए, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।
हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्रवाई, उत्तरी इज़रायल भी निशाने पर
इजरायली हमलों के बाद हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। संगठन की ओर से उत्तरी इज़रायल की तरफ रॉकेट और ड्रोन दागे गए, जिससे सीमा के पास के इलाकों में अलर्ट जारी करना पड़ा। कुछ हमलों में इज़रायली सैनिकों के घायल होने की भी खबर है।
खाली करने की चेतावनी, बढ़ा मानवीय संकट
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी है। सेना का कहना है कि जिन जगहों के आसपास हिज़्बुल्लाह की गतिविधियां हैं, वहां रहना खतरनाक हो सकता है। इस चेतावनी के बाद हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है।
युद्धविराम पर उठते सवाल
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में सीज़फायर केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार हो रहे हमले इस बात का संकेत दे रहे हैं कि तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा
मध्य-पूर्व पहले ही कई संघर्षों से जूझ रहा है, और इज़रायल-लेबनान सीमा पर बढ़ती हिंसा पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।