दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक बयान सुर्खियों में है。 दिल्ली में जन-जी (Gen-Z) युवाओं के साथ बातचीत के दौरान जब राहुल से पूछा गया कि बीजेपी में उनका पसंदीदा नेता कौन है, तो उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया।
राहुल गांधी ने कहा— “कैप्टन अमरिंदर सिंह, डेफिनेटली। मैं उनके साथ आसानी से घुल-मिल जाता हूं। वह कूल हैं और मिलिट्री हिस्ट्री के एक्सपर्ट हैं, इसलिए मैं उन्हें पसंद करता हूं। हेलो अंकल अमरिंदर…”
राहुल गांधी के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कैप्टन की कांग्रेस में वापसी की अटकलें लगने लगीं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिक्रिया
इन अटकलों पर विराम लगाते हुए बीजेपी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पॉलिटिक्स और पर्सनल लाइफ अलग-अलग होती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब बीजेपी में हैं और कांग्रेस में वापस नहीं जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीजेपी में बहुत नियम हैं और वह कई बार कांग्रेस के पुराने पारिवारिक माहौल को मिस करते हैं।
सिंगर जसबीर जस्सी का तंज
राहुल गांधी के इस बयान पर पंजाबी गायक जसबीर जस्सी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा, “राहुल जी, कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ करने में आप काफी लेट हो गए। जब आपने उन्हें सीएम की कुर्सी से उतारा था, तभी मैंने कहा था कि उनकी एग्जिट सम्मानजनक तरीके से करानी चाहिए थी।”
कैप्टन के जाने से कांग्रेस को हुआ नुकसान
पंजाब के 2022 चुनावों में कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। चुनाव से ठीक 3 महीने पहले कैप्टन को सीएम पद से हटाने और चरणजीत सिंह चन्नी को कमान सौंपने के बाद पार्टी महज 18 सीटों पर सिमट गई थी। कैप्टन के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस का पारंपरिक जट्ट सिख वोट बैंक छिटक गया, जो राज्य की 80-85 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है।
कैप्टन के बाद पार्टी में नवजोत सिंह सिद्धू, चरणजीत चन्नी और राजा वडिंग के बीच तनातनी के कारण संगठनात्मक बिखराव और गुटबाजी बढ़ी। कैप्टन पंजाब के उन गिने-चुने नेताओं में से थे, जिनकी हिंदू और सिख दोनों समुदायों के मतदाताओं में समान पकड़ थी, जिससे उनके जाने के बाद पार्टी के पास कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं बचा।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद पंजाब कांग्रेस के कुछ नेताओं में कैप्टन की वापसी की उम्मीद जगी है, वहीं राजनीतिक जानकार इसे गांधी परिवार और पटियाला राजघराने के पुराने पारिवारिक संबंधों के तौर पर देख रहे हैं।