दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव से पहले हुई इस बैठक को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। वहीं आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भी इस मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की बैठक पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
शुक्रवार सुबह सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के बाद पंजाब की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें शुरू हो गईं। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इस मुलाकात को भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अकाली दल-भाजपा गठबंधन की वापसी की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अकाली दल और भाजपा के बीच फिर से गठबंधन की संभावनाओं पर बातचीत हो सकती है। हालांकि दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात ने अटकलों को और बल दिया है।
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तंज कसते हुए दोनों दलों के संभावित गठबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लेकर राजनीतिक टिप्पणी की, जिसके बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
सुखबीर सिंह बादल ने केजरीवाल के आरोपों का दिया जवाब
सुखबीर सिंह बादल ने भी सोशल मीडिया के जरिए पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। उन्होंने अवैध खनन सहित कई मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता से किए गए दावों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
प्रताप सिंह बाजवा ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक घटनाक्रम से नए समीकरण बन सकते हैं, लेकिन इससे पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव आएगा या नहीं, इसका फैसला जनता करेगी।
करीब ढाई दशक तक साथ रहा अकाली-भाजपा गठबंधन
पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन 1996 में शुरू हुआ था और लगभग 25 वर्षों तक दोनों दल साथ रहे। इस दौरान 1997, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में गठबंधन ने सरकार बनाई। इसे पंजाब की राजनीति के सबसे लंबे और सफल गठबंधनों में गिना जाता है।
कृषि कानूनों के विरोध के बाद टूटा था साथ
वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला लिया था। इसके बाद दोनों दल अलग-अलग राजनीतिक रास्तों पर चलते रहे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद एक बार फिर दोनों दलों के रिश्तों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।