दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दे जोरदार ढंग से उठाए। अवैध माइनिंग, कनाडा में पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से जुड़े विवाद, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नहरी पानी, अस्पतालों की सुविधाएं, पेंशन, पंचायत भूमि नीलामी, E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति और कानून-व्यवस्था जैसे विषय सदन में चर्चा के केंद्र में रहे।
अवैध माइनिंग पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अवैध माइनिंग का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले सदन में दावा किया गया था कि पंजाब में कहीं भी अवैध माइनिंग नहीं हो रही, लेकिन बाद में सामने आई रिपोर्टों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने अलग तस्वीर दिखाई। बाजवा ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में रिपोर्टें लंबे समय तक लंबित रहीं और उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
कनाडा में फंसे पंजाबी छात्रों की मदद का भरोसा
एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कनाडा में पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) से प्रभावित पंजाबी छात्रों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि करीब 1,500 अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रभावित हैं। पंजाब सरकार ने यह मामला केंद्र के समक्ष उठाया है और छात्रों के आवेदनों की दोबारा समीक्षा कराने की मांग की है। जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता और अन्य सहयोग भी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
दौलतपुर पंचायत भूमि नीलामी पर तीखी बहस
आप विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने गांव दौलतपुर की पंचायत भूमि की नीलामी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह साबित कर दे कि अधिकतम कीमत पर पारदर्शी तरीके से बोली कराई गई थी तो वे विधायक पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं।
राजस्व मंत्री का जवाब
राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि जमीन की समय पर नीलामी कराई गई थी, लेकिन लोगों ने बोली नहीं लगाई। अब तीसरी बार नीलामी की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि पंचायत की जमीन कम से कम 20 प्रतिशत अधिक कीमत पर नीलाम हो।
ग्यासपुरा बोले- सदन झूठ बोलने का अड्डा नहीं
मंत्री के जवाब पर ग्यासपुरा ने कहा कि यदि गांव दौलतपुर की पंचायत जमीन की बोली करवाने का दावा साबित हो जाए तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सदन झूठ बोलने का अड्डा नहीं है और यहां केवल सच ही बोला जाना चाहिए।
पटवारी पर मनमानी और भेदभाव के आरोप
आप विधायक गुरदित सिंह ने सिंचाई व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र का एक पटवारी खुद को “चीफ सेक्रेटरी” समझता है। उन्होंने कहा कि पानी के बंटवारे में भेदभाव किया जा रहा है और मृत लोगों के नाम पर भी पर्चे दर्ज किए गए हैं।
डेराबस्सी में नहरी पानी पहुंचाने की मांग
विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि डेराबस्सी, लालड़ू और जीरकपुर में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई स्थानों पर पानी 1300 फीट तक पहुंच चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इलाके में नहरी पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
SIR को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
आप विधायक शैरी कलसी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से वोट कटने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे पर इसलिए नहीं बोल रहा क्योंकि उसकी भाजपा से सांठगांठ है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की।
70 वर्ष से अधिक पेंशनरों का मुद्दा उठा
भाजपा विधायक जंगी लाल महाजन ने पंजाब कृषि विकास बैंक के पेंशनरों की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि 147 बुजुर्ग पेंशनरों को लंबे समय से पेंशन नहीं मिली है और सरकार को जल्द राशि जारी करनी चाहिए।
कुराली अस्पताल पर सरकार का पक्ष
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि फिलहाल कुराली अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि नजदीक पीजीआई चंडीगढ़ में ट्रॉमा सेंटर पहले से मौजूद है। हालांकि अस्पताल भवन के उन्नयन का प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेजा गया है।
परगट सिंह ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की सोशल मीडिया पोस्ट पर कॉपीराइट स्ट्राइक लगाई जा रही हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
स्पीकर ने विधायकों को लगाई फटकार
सदन की कार्यवाही के दौरान कुछ विधायक आपस में बातचीत करते दिखाई दिए। इस पर स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उन्हें सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत देते हुए कहा कि यदि बातचीत करनी है तो बाहर जाकर करें।
केंद्र सरकार पर AAP का हमला
आम आदमी पार्टी ने विधानसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ हमला तेज करते हुए कहा कि पिछले तीन दिनों में केंद्र से जुड़े दो प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। सरकार ने पेपर लीक मामलों से निपटने में कथित विफलता और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की तथा दावा किया कि 2014 के बाद देश में 93 पेपर लीक हुए, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ।
E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति का विरोध
सदन में केंद्र की अनिवार्य E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति का भी विरोध किया गया। इसे वापस लेने या स्थगित करने की मांग करते हुए कहा गया कि इससे वाहनों के इंजन प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। साथ ही बिना इथेनॉल (E0) या कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई।