दोआबा न्यूजलाइन। सतपाल शर्मा
होशियारपुर से संबंध रखने वाली एक महिला की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों का भविष्य संवार दिया। शादी के बाद टांडा के गांव में रहने वाली मनदीप कौर साल 2012 में अपने छोटे बच्चों के साथ यूरोप चली गईं। शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

परिवारिक हालात ने बदली जिंदगी की दिशा
विदेश पहुंचने के कुछ समय बाद ही पारिवारिक परिस्थितियां बदल गईं और उन्हें बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालनी पड़ी। इस मुश्किल दौर में उन्होंने खुद को संभालते हुए अपने बच्चों की परवरिश और शिक्षा को प्राथमिकता दी।
छोटे-मोटे काम कर बच्चों को दी शिक्षा
मनदीप कौर ने विदेश में रहते हुए रेस्टोरेंट और अन्य जगहों पर काम किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाई। भाषा और माहौल की दिक्कतों के बावजूद बच्चों ने भी मेहनत जारी रखी और स्थानीय सिस्टम के अनुसार खुद को ढाल लिया।

बड़ी बेटी ने राजनीति में बनाई पहचान
मनदीप की बड़ी बेटी हरप्रीत कौर ने पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेना शुरू किया। लोगों के बीच काम करने और उनकी समस्याओं को समझने के कारण उसे स्थानीय स्तर पर पहचान मिली। इसके बाद उसने चुनावी प्रक्रिया में भाग लिया और सफलता हासिल की, जिससे उसे प्रशासनिक निकाय में प्रतिनिधित्व का मौका मिला।

छोटी बेटी ने भी संभाली जिम्मेदारी
परिवार की बड़ी बेटी से प्रेरित होकर छोटी बेटी कोमलप्रीत कौर ने भी समाजसेवा के क्षेत्र में कदम रखा। उसने भी स्थानीय स्तर पर चुनाव में भाग लिया और लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रही। दोनों बहनें अब प्रवासी समुदाय के मुद्दों को उठाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
समाजसेवा से मिली नई पहचान
दोनों बेटियों ने शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में योगदान देकर अलग पहचान बनाई। वे जरूरतमंदों की मदद, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे कार्यों में हिस्सा लेती रही हैं, जिससे उन्हें लोगों का समर्थन मिला।
विदेशी सिस्टम में राजनीति का अलग मॉडल
मनदीप कौर के अनुसार, वहां राजनीति को सेवा के रूप में देखा जाता है। प्रतिनिधि बनने के बाद भी लोगों को अपने पेशे से जुड़े रहना होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है।
संघर्ष भरे सफर ने दिलाई सफलता
मनदीप कौर का कहना है कि शुरुआती समय में भाषा और आर्थिक स्थिति सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन मेहनत और हौसले से उन्होंने सब कुछ पार किया। आज उनकी बेटियां अपने दम पर एक नई पहचान बना चुकी हैं और समाज में योगदान दे रही हैं।
नई पीढ़ी के लिए बनी मिसाल
यह कहानी न सिर्फ एक परिवार की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कठिन हालात में भी अगर हिम्मत और मेहनत हो तो बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। मनदीप कौर और उनकी बेटियां आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।