दोआबा न्यूजलाइन। सतपाल शर्मा
हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे निकाय चुनावों ने राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म कर दिया है। राज्य के कई नगर निगमों और शहरी निकायों में मतदान 17 मई को प्रस्तावित है। इस बार चुनाव सिर्फ भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई तक सीमित नहीं दिख रहे, बल्कि बागी नेताओं, स्थानीय चेहरों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है।
धर्मशाला, मंडी, पालमपुर, सोलन, हमीरपुर और ऊना समेत कई नगर निगमों में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं बद्दी को नए नगर निगम के रूप में शामिल किए जाने के बाद यहां का मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चाओं में बना हुआ है। माना जा रहा है कि पहली बार निगम बनने के कारण बद्दी में स्थानीय मुद्दे और विकास सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा रहेंगे।
बागियों ने बढ़ाई पार्टियों की चिंता
टिकट वितरण के बाद कई जगहों पर नाराजगी खुलकर सामने आई है। दोनों प्रमुख दलों के असंतुष्ट नेता निर्दलीय मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि निकाय चुनावों में अक्सर स्थानीय लोकप्रियता पार्टी लाइन पर भारी पड़ती है और यही कारण है कि इस बार बागी प्रत्याशी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
शहरी विकास और पानी-सफाई बने बड़े मुद्दे
इन चुनावों में सड़कों, सीवरेज, पेयजल, पार्किंग और सफाई व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहने वाले हैं। खासकर पर्यटन क्षेत्रों में स्थानीय लोग नगर निगमों के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई शहरों में लोग टैक्स बढ़ोतरी और अधूरे विकास कार्यों को लेकर भी नाराज बताए जा रहे हैं।
भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
राज्य की सत्ता और संगठन दोनों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। भाजपा जहां शहरी वोट बैंक को मजबूत बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस निकायों में बेहतर प्रदर्शन कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे आने वाले विधानसभा समीकरणों पर भी असर डाल सकते हैं।
नए निगमों पर सबकी नजर
बद्दी जैसे नए नगर निगमों में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए यहां उत्साह अलग स्तर पर दिखाई दे रहा है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां मूलभूत सुविधाओं और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर लोगों की अपेक्षाएं काफी ज्यादा हैं। पार्टियां भी यहां अलग-अलग रणनीति के तहत प्रचार कर रही हैं।
निर्दलीय उम्मीदवार बदल सकते हैं तस्वीर
पिछले कई राज्यों के निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बड़ा प्रभाव छोड़ा है। हरियाणा और अन्य राज्यों के हालिया चुनाव नतीजों में कई जगह निर्दलियों का दबदबा देखने को मिला, जिससे हिमाचल में भी ऐसे समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
अब देखना होगा कि हिमाचल की जनता इस बार राष्ट्रीय मुद्दों पर वोट करती है या स्थानीय चेहरों और शहरों के विकास को प्राथमिकता देती है। फिलहाल चुनावी मैदान पूरी तरह सज चुका है और अगले कुछ दिन पहाड़ की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।