सीमा पार से आई प्रलयकारी बाढ़ से नेपाल में हाहाकार
दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
तिब्बत के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के कारण नेपाल में भीषण प्राकृतिक आपदा आ गई है। तिब्बत की तरफ से अनियंत्रित गति से आए मलबे और पानी के विशाल सैलाब ने नेपाल की प्रमुख नदियों में अचानक विकराल बाढ़ ला दी है। इस प्रलयकारी बाढ़ और उसके बाद जगह-जगह हुए भारी भूस्खलन ने नेपाल के नदी तटीय क्षेत्रों, बुनियादी ढांचे और प्रमुख राजमार्गों को बुरी तरह तबाह कर दिया है।

बाढ़ की चपेट में आने से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों वाहन जलमग्न हो चुके हैं और हजारों की संख्या में स्थानीय लोग तथा तीर्थयात्री अलग-अलग दुर्गम स्थानों पर फंसे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर वायु सेना और राहत एजेंसियों को तैनात कर आपातकालीन बचाव अभियान शुरू किया है।
चितवन में नदियों का तांडव: त्रिशूली और नारायणी से 64 शव बरामद
बाढ़ के तीव्र बहाव के कारण जान-माल का सबसे भयावह मंजर चितवन जिले में सामने आया है। तिब्बत की ओर से उफान पर आई त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारों से बचाव दलों द्वारा अब तक 64 शव और मानव अवशेष बरामद किए जा चुके हैं।

- क्षत-विक्षत स्थिति में मिले शव: पानी के तेज प्रवाह और विशाल चट्टानी मलबे के कारण बरामद किए गए शवों में से कई पूरी तरह क्षत-विक्षत हैं, जबकि कई स्थानों पर केवल शरीर के अंग ही बरामद हो पाए हैं।
- भरतपुर अस्पताल में मोर्चरी व्यवस्था: जिला पुलिस प्रशासन के अनुसार, बरामद सभी 64 शवों और मानव अवशेषों को पहचान और डीएनए/पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए भरतपुर अस्पताल के शवगृह (मोर्चरी) में सुरक्षित रखवाया गया है।
- लापता लोगों की खोज: स्थानीय गोताखोर, नेपाल पुलिस और सेना के जवान नदी के निचले इलाकों और तटीय दलदली क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि पानी में बहे अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश की जा सके।
क्या है तबाही की मुख्य वजह? समझिए GLOF का विज्ञान
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ का मुख्य कारण वैज्ञानिक रूप से ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ (GLOF) बताया गया है।
- ग्लेशियर झील का टूटना: उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने से उनके पीछे प्राकृतिक रूप से विशाल बर्फीली झीलों का निर्माण हो जाता है। जब तापमान बढ़ने या बर्फ के अत्यधिक दबाव के कारण ग्लेशियर की प्राकृतिक दीवार में दरार आती है, तो झील की दीवार अचानक टूट जाती है।
- जल और मलबे का तीव्र प्रवाह: झील टूटने के बाद करोड़ों लीटर पानी, कीचड़, पत्थर और विशालकाय ग्लेशियर का मलबा अत्यधिक गति से ढलानों से नीचे नदियों में गिरता है। यह बहाव इतना तीव्र होता है कि रास्ते में आने वाले पुलों, सड़कों और बस्तियों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता।
- चीनी हेलीकॉप्टर का हवाई सर्वेक्षण: आपदा के मुख्य उद्गम स्थल का निरीक्षण करने के लिए चीनी विमानन टीम का हेलीकॉप्टर उस सटीक बिंदु पर पहुंचा जहां से ग्लेशियर टूटा था। हवाई सर्वेक्षण और उस स्थान के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें ग्लेशियर के टूटने और वहां से मलबे का विशाल सैलाब निकलते हुए देखा जा सकता है।
राजमार्गों पर वाहनों का जलसमाधि: भोटेकोशी नदी में 1000 गाड़ियां फंसीं
चीन की सीमा से सटे क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आए भारी जलप्रवाह ने नेपाल के मुख्य सड़क मार्गों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
- प्रमुख सड़कें व पुल क्षतिग्रस्त: नदी के रौद्र रूप और लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण राजमार्ग कई स्थानों पर कटकर बह गए हैं।
- 800 से 1,000 वाहन फंसे व डूबे: राजमार्गों पर अचानक पानी भरने और पहाड़ का मलबा गिरने से करीब 800 से 1000 गाड़ियां फंस गईं या पूरी तरह जलमग्न हो गईं।
- 300 यात्री बसें भी शामिल: जलभराव और मलबे में फंसी गाड़ियों में लगभग 300 यात्री बसें भी शामिल हैं। इन बसों में सवार हजारों दैनिक यात्री और पर्यटक हाइवे पर सुरक्षित स्थानों और ऊंचे टीलों पर शरण लिए हुए हैं। पीने के पानी और भोजन की कमी के कारण यात्रियों में अफरा-तफरी का माहौल है।
गोसाईंकुंड तीर्थयात्रा पर संकट: 20 बसों से संपर्क टूटा
नेपाल के प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थस्थल ‘गोसाईंकुंड’ की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
- 18 से 20 बसें लापता: नेपाली मीडिया की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, काठमांडू से श्रद्धालुओं को लेकर गोसाईंकुंड के लिए रवाना हुईं 18 से 20 बसों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
- यात्रियों की स्थिति अज्ञात: भूस्खलन और बाढ़ के कारण पर्वतीय रास्तों में मोबाइल नेटवर्क और वायरलेस संपर्क ठप हो चुका है। इन बसों में सवार तीर्थयात्रियों की वास्तविक स्थिति, उनकी सुरक्षा और लोकेशन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आ पाई है, जिससे श्रद्धालुओं के परिजनों में भारी चिंता और दहशत का माहौल है।
युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन: 30 हेलीकॉप्टरों की तैनाती
सड़क मार्ग पूरी तरह कट जाने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए नेपाल सरकार ने देश के सबसे बड़े हवाई बचाव अभियानों में से एक शुरू किया है।
- त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नियंत्रण कक्ष: काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ‘रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर’ (RCC) की स्थापना की गई है। इस सेंटर से सुबह 6:30 बजे से ही राहत एवं बचाव कार्यों का सीधा संचालन किया जा रहा है।
- 30 हेलीकॉप्टरों का बेड़ा: नेपाल सरकार ने बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करने के लिए कुल 30 हेलीकॉप्टर मिशन में लगाए हैं।
- रणनीतिक अभियान: इनमें से 10 हेलीकॉप्टरों को तत्काल उन संवेदनशील और गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में भेजा जा चुका है जहां लोग छतों, पेड़ों या पहाड़ों पर फंसे हैं। वहीं, 20 अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय मोड पर रखा गया है ताकि मौसम साफ होते ही उन्हें तुरंत नए ऑपरेशनों में झोंका जा सके।
- राहत सामग्री का वितरण: जिन स्थानों पर हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर सकते, वहां फंसे यात्रियों और ग्रामीणों के लिए भोजन के पैकेट, जरूरी दवाइयां और पीने का साफ पानी एयरड्रॉप किया जा रहा है।
प्रशासनिक सतर्कता और आगामी चुनौतियां
आपदा प्रबंधन विभाग ने चेतावनी जारी की है कि नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान के करीब बना हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों में पर्वतीय इलाकों में और अधिक बारिश की आशंका जताई है, जिससे भूस्खलन और जलभराव का खतरा और बढ़ सकता है। सरकार ने नदी किनारे रहने वाले सभी नागरिकों को सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की सख्त हिदायत दी है।