दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी भीषण तनाव और सैन्य टकराव पर आखिरकार पूरी तरह विराम लग गया है। अमेरिका और ईरान ने युद्ध को हमेशा के लिए समाप्त करने वाले एक ऐतिहासिक अंतरिम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस ‘पीस डील’ को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर मंडरा रहा एक बड़ा आर्थिक और सैन्य संकट टल गया है।
फ्रांस के उसी ऐतिहासिक महल में हुआ समझौता, जहाँ थमा था प्रथम विश्व युद्ध
इस शांति समझौते के लिए जगह का चुनाव बेहद प्रतीकात्मक रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मौजूदगी में पेरिस के प्रसिद्ध वर्साय पैलेस (Palace of Versailles) में इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। ठीक 107 साल पहले (1919 में) इसी महल में वर्साय की संधि हुई थी, जिसने प्रथम विश्व युद्ध का अंत किया था।
ट्रम्प के दस्तखत करने के तुरंत बाद, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान से इलेक्ट्रॉनिक (डिजिटल) माध्यम से इस समझौते पर अपनी सहमति जताते हुए साइन किए। डील फाइनल होने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “यह रास्ता आसान नहीं था, लेकिन हमने उम्मीद से कहीं ज्यादा हासिल किया है।”
समझौते की 5 सबसे बड़ी और मुख्य बातें:
सैन्य कार्रवाई पर तुरंत रोक: ईरान और लेबनान के क्षेत्रों में जारी सभी अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं के मिलिट्री एक्शन को तुरंत रोक दिया गया है।
होर्मुज स्ट्रेट को खोला गया: व्यापार के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को दोबारा खोल दिया गया है। अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) हटाएगा।
60 दिनों तक नो-टैक्स: समझौते के तहत अगले दो महीनों तक इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से कोई टैक्स या ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर लगाम: ईरान इस बात पर सहमत हुआ है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेगा।
ट्रम्प की सख्त चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, तो उस पर पहले से भी अधिक भीषण बमबारी की जाएगी।
वैश्विक बाजार और भारत को मिलेगी बड़ी राहत
इस समझौते का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर देखने को मिलेगा। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई ठप थी, जिससे दुनियाभर में ईंधन महंगा होने का खतरा था। अब इस रास्ते के खुलने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और तेल की कीमतों में गिरावट आएगी।
आगे की राह: 60 दिनों का ‘अग्निपरीक्षा’ पीरियड
कूटनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, यह केवल एक अंतरिम (शुरुआती) समझौता है। असली चुनौती अगले 60 दिनों में होगी। दोनों देशों की टीमें आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में मुलाकात करेंगी, जहां प्रतिबंधों को हटाने की टाइमलाइन, परमाणु कार्यक्रम की कड़ी मॉनिटरिंग और इस अस्थायी शांति को ‘स्थायी शांति’ में बदलने के रोडमैप पर चर्चा होगी।
हालांकि, ईरान के भीतर से अभी से अलग सुर भी आने लगे हैं। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बयान दिया है कि 60 दिन का समय पूरा होने के बाद ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स वसूल करेगा, क्योंकि इस क्षेत्र पर ईरान का संप्रभु अधिकार है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह शांति कितनी लंबी टिक पाती है।