दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
Asaduddin Owaisi ने केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। ओवैसी ने कहा कि भारत अपने लोगों से बनता है, किसी देवी-देवता से नहीं।
मोदी कैबिनेट ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
दरअसल, Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा देने की तैयारी है।
सोशल मीडिया पर ओवैसी की तीखी प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि ‘वंदे मातरम’ एक देवी की स्तुति है और इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक ‘जन गण मन’ भारत और उसके नागरिकों का सम्मान करता है, किसी विशेष धर्म का नहीं।
संविधान और “हम भारत के लोग” का हवाला
ओवैसी ने आगे कहा कि संविधान “हम भारत के लोग” से शुरू होता है, न कि “भारत माता” से। उन्होंने दावा किया कि संविधान सभा में भी प्रस्तावना को देवी या ईश्वर के नाम से शुरू करने के सुझाव खारिज कर दिए गए थे।
“देश किसी देवी-देवता की संपत्ति नहीं”
एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी कहा कि भारत किसी देवी-देवता की संपत्ति नहीं है और देश संविधान के आधार पर चलता है। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आस्था और पूजा की आजादी का हवाला देते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए।
कानून लागू होने पर बदलेंगे नियम
सरकार के प्रस्ताव के लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम’ के सम्मान से जुड़े नियम वही होंगे जो वर्तमान में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ पर लागू हैं। उल्लंघन की स्थिति में इसे संज्ञेय अपराध माना जा सकेगा।