दोआबा न्यूजलाइन । सतपाल शर्मा
दिनेश ढल्ल के भाजपा में शामिल होने के बाद जालंधर नॉर्थ की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। एक ऐसा नेता, जिसने कांग्रेस से बगावत कर चुनावी राजनीति में कदम रखा, बाद में आम आदमी पार्टी के साथ विधानसभा चुनाव लड़ा और करीब साढ़े चार साल तक नॉर्थ में आप के संगठन की जिम्मेदारी संभाली, अब भाजपा के साथ खड़ा है। यही वजह है कि ढल्ल का भाजपा में जाना सिर्फ पार्टी बदलने की घटना नहीं, बल्कि जालंधर नॉर्थ के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सबसे बड़ा तत्काल दबाव आप पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जबकि भाजपा को स्थानीय स्तर पर एक अनुभवी राजनीतिक चेहरा मिला है। कांग्रेस के लिए भी अब विपक्ष का समीकरण पहले जैसा नहीं रहेगा।
पार्षद की राजनीति से शुरू हुआ सफर
दिनेश ढल्ल का राजनीतिक सफर नगर निगम की राजनीति से शुरू हुआ। वह नगर निगम पार्षद रहे और स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के बाद विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हुए। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, वह पूर्व कांग्रेस नेता रहे हैं और पूर्व मंत्री अवतार हेनरी के साथ उनके राजनीतिक मतभेद भी रहे। इसी राजनीतिक टकराव के बीच उन्होंने 2012 में जालंधर नॉर्थ से कांग्रेस के बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।
इस चुनाव के साथ ही ढल्ल ने यह संकेत दे दिया था कि वह अपनी राजनीतिक पहचान को केवल किसी एक पार्टी की छत्रछाया तक सीमित रखने वाले नेता नहीं हैं। स्थानीय राजनीति में अपनी पकड़ बनाने के बाद उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह तलाश की।
2012 में कांग्रेस से बगावत का पहला बड़ा पड़ाव
2012 का विधानसभा चुनाव ढल्ल के राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। उस समय उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। यानी जिस पार्टी से उन्होंने राजनीतिक शुरुआत की, उसी के खिलाफ मैदान में उतरना उनके राजनीतिक सफर का पहला बड़ा बदलाव था।
इसके बाद भी वह जालंधर नॉर्थ की राजनीति से अलग नहीं हुए। स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता बनी रही और आने वाले वर्षों में उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा बदली।
2022 में आप के टिकट पर फिर विधानसभा मैदान में
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दिनेश ढल्ल आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जालंधर नॉर्थ से मैदान में उतरे। उस समय वह कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हो चुके थे। द ट्रिब्यून ने भी उन्हें पूर्व कांग्रेस नेता और दो बार के पार्षद के तौर पर आप उम्मीदवार के रूप में दर्ज किया था।
2022 का चुनाव ढल्ल के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्होंने एक बार फिर जालंधर नॉर्थ में सीधे विधानसभा मुकाबले में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। चुनाव में कांग्रेस के अवतार सिंह जूनियर विजयी रहे, भाजपा के केडी भंडारी दूसरे स्थान पर रहे और ढल्ल तीसरे स्थान पर रहे। चुनाव आयोग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस उम्मीदवार को 47,338 वोट, भाजपा उम्मीदवार केडी भंडारी को 37,852 वोट और आप उम्मीदवार दिनेश ढल्ल को 32,685 वोट मिले थे।
चुनाव हारने के बाद भी आप में महत्वपूर्ण भूमिका
विधानसभा चुनाव जीतने में सफल नहीं होने के बावजूद ढल्ल की आप में राजनीतिक भूमिका खत्म नहीं हुई। पार्टी ने उन्हें जालंधर नॉर्थ में संगठनात्मक जिम्मेदारी दी और करीब साढ़े चार साल तक वह हलका इंचार्ज के तौर पर काम करते रहे। द ट्रिब्यून के अनुसार, वह लगभग साढ़े चार साल तक इस पद पर रहे।
इस दौरान उनका फोकस चुनावी राजनीति के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर रहा। यही लंबा संगठनात्मक कार्यकाल अब उनके भाजपा में जाने को आप के लिए अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है।
29 जुलाई को बदली जिम्मेदारी और फिर बदला राजनीतिक रास्ता
ढल्ल के राजनीतिक सफर में अगला बड़ा मोड़ 29 जुलाई 2026 को आया। आम आदमी पार्टी ने जालंधर नॉर्थ के हलका इंचार्ज पद से ढल्ल को हटाकर मेयर वनीत धीर को जिम्मेदारी सौंप दी। द ट्रिब्यून के मुताबिक, यह बदलाव पार्टी के व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा था और वनीत धीर को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नॉर्थ में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए समय देने की रणनीति के तौर पर देखा गया।
इसके बाद ढल्ल और उनकी टीम में नाराजगी की चर्चा सामने आई। द ट्रिब्यून की 2 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ढल्ल इस फैसले के बाद नाराज बताए जा रहे थे और उन्होंने नॉर्थ में पिछले करीब साढ़े चार साल के दौरान कराए गए विकास कार्यों को भी सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया था।
अब भाजपा में एंट्री, साथ आए समर्थक
2 सितंबर 2026 को दिनेश ढल्ल ने भाजपा का दामन थाम लिया। पंजाब भाजपा अध्यक्ष के अलावा पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस मौके पर मौजूद रहे। उनके साथ एक दर्जन से ज्यादा समर्थकों ने भी भाजपा की सदस्यता ली। इनमें उनके चचेरे भाई और नगर निगम पार्षद अमित ढल्ल भी शामिल रहे।
यहीं से इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है। क्योंकि भाजपा में जाने वाले केवल ढल्ल नहीं हैं, बल्कि उनके साथ स्थानीय स्तर पर जुड़े कुछ लोग भी पार्टी में पहुंचे हैं। अब भाजपा की कोशिश होगी कि इस राजनीतिक नेटवर्क को पार्टी के संगठन के साथ जोड़ा जाए।
आप के लिए सबसे बड़ा डेंट
ढल्ल के जाने से तत्काल सबसे बड़ा राजनीतिक झटका आम आदमी पार्टी को माना जा सकता है। कारण यह है कि ढल्ल सिर्फ 2022 के उम्मीदवार नहीं थे, बल्कि लंबे समय तक नॉर्थ में पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभालते रहे।
आप ने उनकी जगह मेयर वनीत धीर को हलका इंचार्ज बनाया था। अब धीर के सामने दोहरी चुनौती होगी—एक तरफ संगठन को मजबूत करना और दूसरी तरफ उन कार्यकर्ताओं में भरोसा बनाए रखना जो लंबे समय से ढल्ल के साथ काम कर रहे थे।
हालांकि यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि ढल्ल के साथ जुड़े सभी समर्थक भाजपा में चले जाएंगे। वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में तब सामने आएगा, जब स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अपने अगले कदम तय करेंगे।
भाजपा को फायदा, लेकिन टिकट का सवाल बरकरार
भाजपा को ढल्ल के रूप में ऐसा चेहरा मिला है जिसे नॉर्थ की स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों का अनुभव है। उनके कांग्रेस और आप दोनों से जुड़े राजनीतिक अतीत के कारण उनके पास अलग-अलग राजनीतिक समूहों के साथ संपर्क होने की संभावना भी भाजपा के लिए उपयोगी हो सकती है।
लेकिन भाजपा के सामने अपनी चुनौती भी है। नॉर्थ में केडी भंडारी पहले से पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे हैं और दो बार विधायक भी रह चुके हैं। ढल्ल के भाजपा में शामिल होने के दौरान भंडारी की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में रही। हालांकि इस आधार पर 2027 की टिकट को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
कांग्रेस के लिए भी बदल गया विपक्ष
ढल्ल का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए भी महत्वपूर्ण है। वह खुद कांग्रेस से राजनीति शुरू कर चुके हैं और 2012 में पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। बाद में आप के उम्मीदवार बने और अब भाजपा में हैं।
इस राजनीतिक सफर का मतलब यह है कि नॉर्थ में ढल्ल की भूमिका केवल एक नए भाजपा नेता के तौर पर नहीं देखी जाएगी। वह स्थानीय राजनीति के ऐसे चेहरे हैं जिन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम किया है। अगर भाजपा उनकी स्थानीय पकड़ को संगठन के साथ जोड़ने में सफल रहती है तो कांग्रेस के सामने भी चुनौती बढ़ सकती है।
2027 से पहले तीनों दलों की परीक्षा
अब नॉर्थ में तीनों प्रमुख दलों के सामने अलग-अलग चुनौती है। आप को अपना संगठन संभालना होगा, कांग्रेस को अपने मौजूदा राजनीतिक आधार को बचाना होगा और भाजपा को ढल्ल की एंट्री को जमीनी ताकत में बदलना होगा।
इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि ढल्ल के भाजपा में जाने से चुनाव का परिणाम बदल गया है। लेकिन इतना जरूर है कि नॉर्थ में मुकाबले की दिशा और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र जरूर बदल गया है।
चुनावी रिकॉर्ड क्या कहता है?
दिनेश ढल्ल के राजनीतिक सफर को चुनावी नजरिए से देखें तो 2012 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जालंधर नॉर्थ से चुनाव लड़ा था और उन्हें 4,371 वोट मिले थे। उस चुनाव में भाजपा के केडी भंडारी विजयी रहे थे, जबकि कांग्रेस के अवतार हेनरी दूसरे स्थान पर रहे थे।
इसके बाद 2022 में ढल्ल आम आदमी पार्टी के टिकट पर जालंधर नॉर्थ से चुनाव लड़े। उस चुनाव में कांग्रेस के अवतार सिंह जूनियर को 47,338 वोट, भाजपा के केडी भंडारी को 37,852 वोट और दिनेश ढल्ल को 32,685 वोट मिले। यानी ढल्ल 2022 में तीसरे स्थान पर रहे।
वहीं संगठन की राजनीति में देखें तो AAP ने ढल्ल को करीब साढ़े चार साल तक जालंधर नॉर्थ का हलका इंचार्ज बनाए रखा। 29 जुलाई 2026 को पार्टी ने यह जिम्मेदारी उनसे लेकर मेयर वनीत धीर को सौंप दी। इसके करीब एक महीने बाद ढल्ल भाजपा में शामिल हो गए।
यानी ढल्ल का राजनीतिक सफर कांग्रेस से बगावत, निर्दलीय चुनाव, आप में एंट्री, लंबे समय तक संगठन की जिम्मेदारी और अब भाजपा में शामिल होने तक पहुंच चुका है। अब देखना यह होगा कि यह पूरा राजनीतिक अनुभव 2027 में भाजपा के लिए कितनी ताकत बनता है और आप तथा कांग्रेस के लिए कितनी बड़ी चुनौती साबित होता है।