दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
नागपंचमी के अवसर पर सोमवार को उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान करीब 13 श्रद्धालु घायल हुए। प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश को छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बैरिकेडिंग गिरने से बिगड़े हालात
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए लंबी कतार में लगे हुए थे। भीड़ बढ़ने के दौरान अचानक बैरिकेडिंग खोले जाने और दबाव बढ़ने से स्थिति बिगड़ गई। एक श्रद्धालु सागर के मुताबिक वह कई घंटे से दर्शन के लिए लाइन में खड़े थे। इसी दौरान बैरिकेड गिरने से उनके दोनों पैर उसके नीचे फंस गए और एक पैर में फ्रैक्चर हो गया।
सागर का आरोप है कि हादसे के बाद उन्हें तत्काल मदद नहीं मिली। बाद में एक व्यक्ति ने उन्हें मेडिकल कैंप तक पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया।
महिला श्रद्धालु की हालत बिगड़ी
ग्वालियर से दर्शन के लिए पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि भगदड़ के दौरान वह गिर गईं। उनके दांत टूट गए और घटना के बाद वह बोलने की स्थिति में नहीं थीं। परिजनों के अनुसार उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
VIP दर्शन को लेकर भी सवाल
घटना के बाद मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। घायल श्रद्धालुओं का आरोप है कि आम श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहे, जबकि VIP दर्शन के लिए अलग व्यवस्था होने की बात सामने आई। एक श्रद्धालु ने दावा किया कि VIP दर्शन के लिए 300 रुपये की रसीद काटे जाने की चर्चा थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 40 हजार श्रद्धालु कतार में
पुलिस के अनुसार नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए करीब 40 हजार श्रद्धालु कतार में थे। नागपंचमी के दिन ही नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। बताया गया कि अब तक लाखों श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर चुके हैं।
प्रशासन ने संभाली स्थिति
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया। घायलों को उज्जैन जिला अस्पताल समेत अन्य चिकित्सा सुविधाओं में पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही गई है।
घटना ने महाकाल मंदिर में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएं।