दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
मोगा में एक युवती ने खुद को पंजाब पुलिस की एएसआई बताकर न सिर्फ लोगों को प्रभावित किया, बल्कि इसी पहचान के सहारे एक परिवार में शादी भी कर ली। करीब दो महीने तक वह पुलिसकर्मी होने का भ्रम बनाए रखती रही। पुलिस को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो पूछताछ में पूरा मामला सामने आया।

पुलिस की नजर में आई संदिग्ध गतिविधियां
युवती लगातार पुलिस की वर्दी में नजर आती थी और पुलिसकर्मी की तरह व्यवहार करती थी। वह मोगा के एक स्थान पर नियमित रूप से पहुंचती और वहां मौजूद लोगों को अपनी ड्यूटी के बारे में बताती थी। उसकी रोजाना की गतिविधियों में एक जैसी स्थिति देखकर पुलिस को संदेह हुआ।
सिर्फ एक घंटे में लौटने से बढ़ा शक
पुलिस के मुताबिक युवती रोजाना एक जगह खाना रखने के बहाने पहुंचती थी और कुछ समय बाद वहां से चली जाती थी। उसने आसपास के लोगों को यह बताया हुआ था कि उसकी ड्यूटी मोगा के मुख्य चौक पर लगी है। पुलिस को यह बात असामान्य लगी और उसकी निगरानी शुरू की गई।
पूछताछ में सामने आई फर्जी पहचान
संदेह के आधार पर पुलिस टीम ने युवती को रोककर पूछताछ की। इस दौरान वह अपने पुलिसकर्मी होने से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि उसने वास्तविक पुलिसकर्मी की पहचान का इस्तेमाल नहीं, बल्कि पूरी तरह फर्जी पहचान तैयार कर रखी थी।
वर्दी, वायरलेस और आई-कार्ड बरामद
पुलिस ने युवती के पास से पंजाब पुलिस जैसी वर्दी, वॉकी-टॉकी और कथित फर्जी पुलिस पहचान-पत्र बरामद किया। इन सामानों के आधार पर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने ये वस्तुएं कहां से हासिल कीं और इन्हें तैयार कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
फर्जी पुलिस पहचान से हुई शादी
जांच में यह भी सामने आया कि युवती ने अपनी कथित पुलिस नौकरी की पहचान के आधार पर करीब एक महीने पहले मोगा के एक संपन्न परिवार में विवाह किया था। ससुराल पक्ष को भी यही विश्वास था कि वह पंजाब पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत है।
दो महीने तक चलता रहा पूरा खेल
बताया गया है कि युवती लगभग दो महीने तक पुलिस अधिकारी होने का दिखावा करती रही। वह वर्दी पहनकर घर से निकलती थी और इस तरह का व्यवहार करती थी कि परिवार तथा आसपास के लोगों को उसकी नौकरी पर कोई संदेह न हो।
अब मददगार की तलाश में पुलिस
युवती के पकड़े जाने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। उसे अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लिया गया। अब जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि फर्जी वर्दी, आई-कार्ड और अन्य सामान की व्यवस्था किसने की तथा इस पूरे फर्जीवाड़े में उसके साथ कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं।