दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
देश में पुलिस, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और सड़क हादसों के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की परेशानी जल्द खत्म हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि सभी आपातकालीन सेवाओं को एकीकृत कर ‘112’ नंबर से जोड़ा जाए।
तीन महीने के भीतर लागू करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशभर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने के लिए तीन महीने के भीतर 112 नंबर को पूरी तरह सक्रिय किया जाए। अदालत ने राज्यों से तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी इंतजाम करने को कहा है ताकि लोगों को एक ही नंबर पर सभी सहायता मिल सके।
अब 100, 101, 108 जैसे नंबर एक प्लेटफॉर्म पर आएंगे
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस के लिए 100, फायर ब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102 और 108 समेत कई हेल्पलाइन सेवाएं 112 से जुड़ जाएंगी। इससे दुर्घटना, आग, अपराध या मेडिकल इमरजेंसी के दौरान लोगों को तुरंत मदद मिल सकेगी।
ट्रॉमा केयर को बताया जीवन के अधिकार का हिस्सा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सड़क हादसों और गंभीर परिस्थितियों में समय पर इलाज मिलना नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला है। अदालत ने कहा कि इमरजेंसी सहायता में देरी कई बार जानलेवा साबित होती है, इसलिए तेज और एकीकृत सिस्टम जरूरी है।
गुड सेमेरिटन कानून पर भी जोर
अदालत ने राज्यों को यह भी निर्देश दिए कि सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वाले लोगों के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने को कहा गया है ताकि लोग बिना डर घायलों की सहायता कर सकें।
मोबाइल ऐप और SOS फीचर भी होगा मजबूत
112 इमरजेंसी सिस्टम को मोबाइल ऐप और स्मार्टफोन SOS फीचर से भी जोड़ा जाएगा। पावर बटन दबाकर या ऐप के जरिए लोग सीधे कंट्रोल रूम तक अपनी लोकेशन भेज सकेंगे। इससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में भी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।