दोआबा न्यूजलाइन। जालंधर
ब्रिटेन में एक छात्र की हत्या के मामले में अदालत ने सिख युवक विक्रम डिगवा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने बेहद खतरनाक तरीके से हमला किया, जिसके कारण एक होनहार छात्र की जान चली गई। मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखने का आदेश दिया।
घटना ने मचाई थी सनसनी
यह मामला उस समय सामने आया जब 18 वर्षीय छात्र हेनरी नोवाक पर देर रात एक विवाद के दौरान हमला किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई थी, जिसके बाद स्थिति हिंसक हो गई। कुछ ही क्षणों में छात्र गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
सीने पर लगातार किए गए वार
जांच में सामने आया कि हमले के दौरान छात्र के सीने पर कई बार वार किए गए थे। गंभीर चोटों के कारण वह मौके पर ही लहूलुहान हो गया। आपातकालीन सेवाओं ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।
जांच में सामने आया सच
घटना के बाद आरोपी ने पुलिस के सामने खुद को पीड़ित बताने की कोशिश की। उसने दावा किया कि उस पर पहले हमला हुआ था और उसने आत्मरक्षा में कदम उठाया। हालांकि सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और फोरेंसिक जांच ने उसके दावों की पुष्टि नहीं की। जांच एजेंसियों को ऐसे कई सबूत मिले जिनसे उसकी कहानी कमजोर पड़ गई।
अदालत ने झूठे दावों को किया खारिज
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने घटना के बाद जांच को भटकाने की कोशिश की थी। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि हमला अत्यधिक हिंसक था और इसे किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने आरोपी के बचाव पक्ष के कई तर्कों को अस्वीकार कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
छात्र की मौत के बाद उसके परिवार और दोस्तों को गहरा सदमा लगा। परिजनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उन्हें कुछ हद तक न्याय मिला है, हालांकि उनके बेटे की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। स्थानीय समुदाय ने भी पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
उम्रकैद की सजा सुनाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही स्पष्ट किया गया कि उसे एक निर्धारित न्यूनतम अवधि तक जेल में रहना होगा, जिसके बाद ही उसकी रिहाई पर विचार किया जा सकेगा। अदालत ने कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाओं के खिलाफ कड़ा संदेश देना जरूरी है।